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india is a huge country of hundreds of castes dividing india badly . Due to casteism india is a weak and soft state . To make india strong and integrated our topmost priority should be to abolish casteim. for this an organisation ' INDIA FIGHTS CASTEISM ' is created. Let us join it and make INDIA A WORLD POWER.
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Sunday, 13 April 2014
Thursday, 10 April 2014
Sunday, 6 April 2014
Saturday, 5 April 2014
Friday, 4 April 2014
Thursday, 3 April 2014
Friday, 28 March 2014
Wednesday, 26 March 2014
आम आदमी की कुंडलिया ---
आम आदमी की कुंडलिया ---
::::::::::::::::::::::::
आम आदमी नाम रख , फिरते हैं कुछ खास ।
उल्टी पुल्टी चाल से , तोड़ रहे विश्वास ।।
तोड़ रहे विश्वास , सदा परनिन्दा करते ,
संविधान से ऊपर खुद को सदा समझते ।।
लगातार ये बना रहे , माहौल मातमी ।
"होरी" बेहद शर्मिन्दा अब आम आदमी ।।
------------------------------------
राज कुमार सचान "होरी"
www.badaltabharat.com , horionline.blogspot.com
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आम आदमी नाम रख , फिरते हैं कुछ खास ।
उल्टी पुल्टी चाल से , तोड़ रहे विश्वास ।।
तोड़ रहे विश्वास , सदा परनिन्दा करते ,
संविधान से ऊपर खुद को सदा समझते ।।
लगातार ये बना रहे , माहौल मातमी ।
"होरी" बेहद शर्मिन्दा अब आम आदमी ।।
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राज कुमार सचान "होरी"
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Sunday, 23 March 2014
मैं भी झेलूं , तू भी झेल
मैं भी झेलूं , तू भी झेल
---------------------
१--लूले अन्धे सत्ताकामी , मैं भी झेलूं ,तू भी झेल ।
प्रजातन्त्र के ये आसामी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।।
२--जब शासन में दु:शासन ,गान्धारी आँखों में पट्टी,
तब तब शकुनी कौड़ी कानी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
३--गान्धी गान्धी मुख से बोलें सत्य अहिंसा खाकर,
बापू के सुन्दर अनुगामी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
४-- जब सत्ता वेश्या बना दी गई होगा क्या ,
सत्ता की औलाद हरामी , मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
५--कहता था मत विष घोलो यूँ हृदयों में ,
अब खून बह रहा जैसे पानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
६-- कश्मीर जलेगा , राष्ट्र जलेगा इसी तरह ,
भ्राता हो जब पाकिस्तानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
७--तन मन तार तार होता है होरी का फिर "होरी"
गोदानों की यही कहानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
८-- खण्ड राष्ट्र फिर खण्डित होने का भय "होरी"
दिल्ली जब जब बनी जनानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
राज कुमार सचान "होरी"
www.badaltabharat.com ,horionline.blogspot.com
Email- rajkumarsachanhori@gmail.com
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१--लूले अन्धे सत्ताकामी , मैं भी झेलूं ,तू भी झेल ।
प्रजातन्त्र के ये आसामी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।।
२--जब शासन में दु:शासन ,गान्धारी आँखों में पट्टी,
तब तब शकुनी कौड़ी कानी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
३--गान्धी गान्धी मुख से बोलें सत्य अहिंसा खाकर,
बापू के सुन्दर अनुगामी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
४-- जब सत्ता वेश्या बना दी गई होगा क्या ,
सत्ता की औलाद हरामी , मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
५--कहता था मत विष घोलो यूँ हृदयों में ,
अब खून बह रहा जैसे पानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
६-- कश्मीर जलेगा , राष्ट्र जलेगा इसी तरह ,
भ्राता हो जब पाकिस्तानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
७--तन मन तार तार होता है होरी का फिर "होरी"
गोदानों की यही कहानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
८-- खण्ड राष्ट्र फिर खण्डित होने का भय "होरी"
दिल्ली जब जब बनी जनानी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
राज कुमार सचान "होरी"
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Wednesday, 19 March 2014
Tuesday, 18 March 2014
Monday, 10 March 2014
डा. भीमराव अम्बेडकर के कुछ सम्बोधन ़़़़़
डा. भीमराव अम्बेडकर के कुछ सम्बोधन ़़़़़
@@@@@@@@@@@@@@@@@@
राज कुमार सचान 'होरी'
"बाबा साहब चरित मानस " के रचनाकार, प्रसिद्ध कवि, एवं लेखक
-----------------------------------------------------------------------------
स्वजनों को सम्बोधित करते हुये ़़़़़़़
"तुम्हारे ये दीन दुबले चेहरे देख कर और करुणा जनक वाणी सुन कर मेरा हृदय फटता है । अनेक युगों से तुम गुलामी की गर्त में बैठ रहे हो ,गल रहे हो ,सड़ रहे हो ; फिर भी तुम्हारी भावना यही है कि तुम्हारी यह गति देव निर्मित है ---ईश्वर के संकेत के अनुसार है । तुम गर्भ में ही क्यों नहीं मरे ? जन्म लेकर तुम जगत में दुख , दरिद्रता और दासता के विकराल चित्र का वीभत्स रूप अपने अवनत और अपमानित जीवन से बढ़ा रहे हो । अगर तुम्हारे जीवन का पुनुरुज्जीवन नहीं हो सकता तो तुम स्वयं मिट कर इस जगत के दुख का बोझ कम क्यों नहीं करते ? तुम मनुष्य जैसे मनुष्य हो ।खुद के कर्तृत्व से जगत में उन्नति करने का अधिकार सबको है । तुम इस देश के निवासी हो ।अन्य भारतीयों के समान अन्न , वस्त्र , आस्रयमिलना तुम्हारा अपना जन्म सिद्ध अधिकार है ।"
कुलाबा ज़िला बहिस्कृत परिषद में ़़़़़़़़़
" नार्मल स्कूल में शिक्षा लेकर लश्कर में हेड मास्टर , सूबेदार , जमादार बन कर बुद्धिमत्ता , तेज , शौर्य दिखाने का मौका उस समाज को मिलता था । मराठे नीचे झुक कर सलाम करते थे । कम्पनी सरकार द्वारा शुरू की गई लश्कर की सख्ती की शिक्षा के कारण उनकी ज्यादा प्रगति हुई थी । जिस अस्प्रश्य समाज की सहायता के बिना ब्रिटिश सरकार का इस देश में प्रवेश कभी न होता , उस अस्पृश्य समाज की भर्ती करना ब्रिटिश सरकार ने आगे बन्द कर दिा , इस लिये यह अनर्थ उनके साथ हुआ है ।" "नेपोलियन ने जिस इंग्लैंड देश को 'काटो तो खून नहीं ' कर दिया ; उस देश ने मराठाशाही को विनष्ट किया ;इसका कारण मराठों के जाति भेद का मनमुटाव और आपसी भेदभाव न हो कर ब्रिटिशों द्वारा इस देशवासियों की सेना खड़ी करना,
है । लेकिन वह सेना थी अस्पृश्य जाति की । अगर अंग्रेजों को अस्पृश्यों का बल प्राप्त न होता ,तो यह देश वे कभी भी काबिज नहीं कर सकते थे " आगे कहा --"हम सरकार के हमेशा अनुकूल होते हैं , इसीलिये तो सरकार हमारी हमेशा उपेक्षा करती है । सरकार जो दे उसे लेना , जो कहे वही सुनना सुनना जिस स्थिति में रहने के लिये बतायेगी उस स्थिति में रहना ---हमारी दास्य वृत्ति बन गयी है ।लश्कर भर्ती पर बन्दी उठाने का भरसक प्रयास करो ।" ....." सरकार एक जबर्दस्त महत्वपूर्ण संस्था है । सरकार के मन में जो होगा , उसके उनुरूप सब कुछ घटित होगा , लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि सरकार कौन सी बातें कर सकेगी ;यह पूरी तरह से सरकारी नौंकरों पर निर्भर है । क्योंकि सरकार े मत का मतलब है सरकारी नौंकरों का मत ।हमें सरकारी नौकरियों में प्रवेश करना चाहिये ।"
गोलमेज परिषद में ़़़़़़़़
"जिन लोगों की स्थिति गुलामों से भी बुरी है और जिनकी जनसंख्या फ्रांस की जनसंख्या जितनी है ,ऐसे भारत के 1/5 लोगों की शिकायतें मैं परिषद के सम्मुख रख रहा हूं । न दलितों की माँग यह है कि भारत सरकार लोगों द्वारा , लोगों के द्वारा चलाया गया , लोगों का राज्य हो । ब्रिटिश राज्य आने से पहले हमारी जो करुणाजनक स्थिति थी , उसमें तनिक भी फ़र्क नहीं पड़ा है । हम केवल मौके की प्रतीक्षा कर रहे हैं । ब्रिटिश राज्यसत्ता से पहले हमें देहातों में कुयें से पानी भरना मना था । क्या ब्रिटिश सरकार ने हमें यह न्याय दिलवाया ? पहले हमें मन्दिर प्रवेश मना था क्या ब्रिटिश सरकार ने दिलवाया ? पुलिस में प्रवेश नहीं था क्या ब्रिटिश सरकार ने दिलवाया ? .....इन सभी प्रश्नों के उत्तर हम नकारात्मक देते हैं । .".....
गांधी अम्बेडकर की प्रथम भेंटमें वार्तालाप से .....
" आप कहते हैं कि आपके पास मातृ भूमि है , लेकिन मैं फिर बताता हूं कि मेरे पास मातृभूमि नहीं है । जिस देश में कुत्ता जिस तरह की ज़िन्दगी जीता है , उस तरह की ज़िन्दगी भी हम नहीं गुज़ार सकते ; कुत्ते बिल्लियों को जितनी सुविधायें प्राप्त होती हैं , उतनी सुविधायें भी हमें हर्ष के साथ जिस देश में नहीं मिलती हैं, उस भूमि को मेरी जन्म भूमि और उस भूमि के धर्म को मेरा धर्म कहने के लिये मैं ही क्या , परन्तु जिसे इन्शानियत का ज्ञान हुआ है औरजिसे स्वाभिमान की परवाहहै --- ऐसा कोई भी अस्पृश्य तैयार नहीं होगा ।इस देश ने हमारे बारे में इतना अक्षम्य अपराध किया है कि हमने उसका कैसा भी और कोई भी भयंकर द्रोणी किया हो , तो भी उससे होने वाले पाप की जिम्मेदारी हमारे शिर नहीं पड़ेगी । ऐसा होने के कारण मुझे अराष्ट्रीय कह कर कोई कितनी भी गालियाँ दे , तो भी उसके बारे में विषाद मान लेने का मेरा कोई प्रयोजन नहीं है क्योंकि मेरे तथाकथित अराष्ट्रीयत्व की जिम्मेदारी मुझ पर न हो कर मुझे अराष्ट्रीय कहने वाले लोगों पर , उस राष्ट्र पर है । मेरे पाप के भागी वे हैं , मैं नहीं । "
मन्दिर प्रवेश के मुद्दे पर ......
" स्पृश्य हिन्दुओं से मेरा कहना है कि आप मन्दिर खोलें या न खोलें , इस पर सोच विचार आप करें । मैं उसके लिये आंदोलन नहीं करूंगा । मनुष्य के पवित्र व्यक्तित्व के प्रति सम्मान रखना आपको सभ्यता का लक्षण लगता है तो आप मन्दिर खोलें और सज्जन जैसा बर्ताव करें । सज्जन बनने की अपेक्षा अगर आपको हिन्दू जन के रूप में शेखी बघारना हो ,तो मन्दिर के द्वार बन्द करो और आत्मनाश करो ।........ जो धर्म असमानता का समर्थन करता है ,उसका विरोध करने का उन्होने निश्चय किया है । अगर हिन्दू धर्म को सामाजिक समता का धर्म बनना है तो उसके क़ानून में अस्पृश्यों को मन्दिरप्रवेश देने तक ही सुधार करना काफ़ी नहीं होगा । उसके लिये चातुर्वर्ण्य निर्मूलन कर उसकी शुद्धि करनी चाहिये ।समस्त असमानता का मूल चातुर्वर्ण्य है । चातुर्वर्ण्य अस्पृश्यता की जननी है क्योंकि जातिभेद और अस्पृश्यता असमानता के अन्य रूप हैं "
वीर सावरकर द्वारा अम्बेडकर को मन्दिर का उद्घाटन करने के निमंत्रण पर ....
"मैं पूर्व नियोजित काम काज की वजह से नहीं आ सकता । लेकिन आप समाज सुधार के क्षेत्र में काम कर रहे हैं उसके बारे में अनुकूल अभिप्राय देने का मौका मैं ले रहा हूं ।अगर अस्पृश्य वर्ग को हिन्दू साजा अभिन्न अंग होना है तो केवल अस्पृश्यता निर्मूलन हो कर नहीं चलेगा । चातुर्वर्ण्य का निर्मूलन होना चाहिये । जिन थोड़े लोगों को इसकी आवश्यकता महसूस हुयी है , उनमें से एक आप हैं , यह कहते हुये मुझे हर्ष होता है ।"
फ़रवरी 1942 मुम्बई के वागले हाल में ' पाकिस्तान विषयक विचार' पर उद्बोधन
"उनके साथ वाद विवाद करने में कोई अर्थ नहीं , जिन्हें पाकिस्तान एक चर्चा का विषय नहीं लगता । अगर उन्हें पाकिस्तान का निर्माण अन्यायकारी लगा होगा तो भविष्यकालीन पाकिस्तान उन्हें एक अत्यंत भयंकर घटना महसूस होगी । यह कहना ग़लत है कि इतिहास को भूल जाओ । जो इतिहास को भूलते हैं , वे इतिहास निर्माण नहीं कर सकेंगे । यह बात अक्ल की है कि भारतीय फौज में से मुसलमानों का प्रतिनिधत्व कम कर के उस फौज को एकीसवीं औरएकनिष्ठ करना ज़रूरी है । अपनी मातृभूमि की सुरक्षा हम ज़रूर करेंगे ...... मैं यह स्वीकार करता हूं कि स्पृश्य हिन्दुओं के साथ कुछ मुद्दों पर मेरा झगड़ा है ,लेकिन आपके सामने मैं यह प्रतिज्ञा करता हूं कि अपने देश की स्वतंत्रता सुरक्षित रखने के लिये मैं अपने प्राण न्योछावर करूंगा ।"
डाक्टर अम्बेडकर के उक्त कुछ उद्बोधनों को उद्धृत करने का मेरा अभिप्राय यह है कि उन्हे उनके मूल में जाने और समझें । वैसे तो उनका जीवन इतनी बड़ी किताब है कि अगर उसके सारे पृष्ठ सम्पूर्ण धरती में फैलाये जायें तो पूरी पृथ्वी ढक जायेगी ।
राज कुमार सचान 'होरी'
176 अभय खण्ड (प्रथम) ,इंदिरापुरम , ग़ाज़ियाबाद
राष्ट्रीय अध्यक्ष -- बदलता भारत( INDIA CHANGES)
www.badaltabharat.com , eid --rajkumarsachanhori@gmail.com , mob 09958788699
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राज कुमार सचान 'होरी'
"बाबा साहब चरित मानस " के रचनाकार, प्रसिद्ध कवि, एवं लेखक
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स्वजनों को सम्बोधित करते हुये ़़़़़़़
"तुम्हारे ये दीन दुबले चेहरे देख कर और करुणा जनक वाणी सुन कर मेरा हृदय फटता है । अनेक युगों से तुम गुलामी की गर्त में बैठ रहे हो ,गल रहे हो ,सड़ रहे हो ; फिर भी तुम्हारी भावना यही है कि तुम्हारी यह गति देव निर्मित है ---ईश्वर के संकेत के अनुसार है । तुम गर्भ में ही क्यों नहीं मरे ? जन्म लेकर तुम जगत में दुख , दरिद्रता और दासता के विकराल चित्र का वीभत्स रूप अपने अवनत और अपमानित जीवन से बढ़ा रहे हो । अगर तुम्हारे जीवन का पुनुरुज्जीवन नहीं हो सकता तो तुम स्वयं मिट कर इस जगत के दुख का बोझ कम क्यों नहीं करते ? तुम मनुष्य जैसे मनुष्य हो ।खुद के कर्तृत्व से जगत में उन्नति करने का अधिकार सबको है । तुम इस देश के निवासी हो ।अन्य भारतीयों के समान अन्न , वस्त्र , आस्रयमिलना तुम्हारा अपना जन्म सिद्ध अधिकार है ।"
कुलाबा ज़िला बहिस्कृत परिषद में ़़़़़़़़़
" नार्मल स्कूल में शिक्षा लेकर लश्कर में हेड मास्टर , सूबेदार , जमादार बन कर बुद्धिमत्ता , तेज , शौर्य दिखाने का मौका उस समाज को मिलता था । मराठे नीचे झुक कर सलाम करते थे । कम्पनी सरकार द्वारा शुरू की गई लश्कर की सख्ती की शिक्षा के कारण उनकी ज्यादा प्रगति हुई थी । जिस अस्प्रश्य समाज की सहायता के बिना ब्रिटिश सरकार का इस देश में प्रवेश कभी न होता , उस अस्पृश्य समाज की भर्ती करना ब्रिटिश सरकार ने आगे बन्द कर दिा , इस लिये यह अनर्थ उनके साथ हुआ है ।" "नेपोलियन ने जिस इंग्लैंड देश को 'काटो तो खून नहीं ' कर दिया ; उस देश ने मराठाशाही को विनष्ट किया ;इसका कारण मराठों के जाति भेद का मनमुटाव और आपसी भेदभाव न हो कर ब्रिटिशों द्वारा इस देशवासियों की सेना खड़ी करना,
है । लेकिन वह सेना थी अस्पृश्य जाति की । अगर अंग्रेजों को अस्पृश्यों का बल प्राप्त न होता ,तो यह देश वे कभी भी काबिज नहीं कर सकते थे " आगे कहा --"हम सरकार के हमेशा अनुकूल होते हैं , इसीलिये तो सरकार हमारी हमेशा उपेक्षा करती है । सरकार जो दे उसे लेना , जो कहे वही सुनना सुनना जिस स्थिति में रहने के लिये बतायेगी उस स्थिति में रहना ---हमारी दास्य वृत्ति बन गयी है ।लश्कर भर्ती पर बन्दी उठाने का भरसक प्रयास करो ।" ....." सरकार एक जबर्दस्त महत्वपूर्ण संस्था है । सरकार के मन में जो होगा , उसके उनुरूप सब कुछ घटित होगा , लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि सरकार कौन सी बातें कर सकेगी ;यह पूरी तरह से सरकारी नौंकरों पर निर्भर है । क्योंकि सरकार े मत का मतलब है सरकारी नौंकरों का मत ।हमें सरकारी नौकरियों में प्रवेश करना चाहिये ।"
गोलमेज परिषद में ़़़़़़़़
"जिन लोगों की स्थिति गुलामों से भी बुरी है और जिनकी जनसंख्या फ्रांस की जनसंख्या जितनी है ,ऐसे भारत के 1/5 लोगों की शिकायतें मैं परिषद के सम्मुख रख रहा हूं । न दलितों की माँग यह है कि भारत सरकार लोगों द्वारा , लोगों के द्वारा चलाया गया , लोगों का राज्य हो । ब्रिटिश राज्य आने से पहले हमारी जो करुणाजनक स्थिति थी , उसमें तनिक भी फ़र्क नहीं पड़ा है । हम केवल मौके की प्रतीक्षा कर रहे हैं । ब्रिटिश राज्यसत्ता से पहले हमें देहातों में कुयें से पानी भरना मना था । क्या ब्रिटिश सरकार ने हमें यह न्याय दिलवाया ? पहले हमें मन्दिर प्रवेश मना था क्या ब्रिटिश सरकार ने दिलवाया ? पुलिस में प्रवेश नहीं था क्या ब्रिटिश सरकार ने दिलवाया ? .....इन सभी प्रश्नों के उत्तर हम नकारात्मक देते हैं । .".....
गांधी अम्बेडकर की प्रथम भेंटमें वार्तालाप से .....
" आप कहते हैं कि आपके पास मातृ भूमि है , लेकिन मैं फिर बताता हूं कि मेरे पास मातृभूमि नहीं है । जिस देश में कुत्ता जिस तरह की ज़िन्दगी जीता है , उस तरह की ज़िन्दगी भी हम नहीं गुज़ार सकते ; कुत्ते बिल्लियों को जितनी सुविधायें प्राप्त होती हैं , उतनी सुविधायें भी हमें हर्ष के साथ जिस देश में नहीं मिलती हैं, उस भूमि को मेरी जन्म भूमि और उस भूमि के धर्म को मेरा धर्म कहने के लिये मैं ही क्या , परन्तु जिसे इन्शानियत का ज्ञान हुआ है औरजिसे स्वाभिमान की परवाहहै --- ऐसा कोई भी अस्पृश्य तैयार नहीं होगा ।इस देश ने हमारे बारे में इतना अक्षम्य अपराध किया है कि हमने उसका कैसा भी और कोई भी भयंकर द्रोणी किया हो , तो भी उससे होने वाले पाप की जिम्मेदारी हमारे शिर नहीं पड़ेगी । ऐसा होने के कारण मुझे अराष्ट्रीय कह कर कोई कितनी भी गालियाँ दे , तो भी उसके बारे में विषाद मान लेने का मेरा कोई प्रयोजन नहीं है क्योंकि मेरे तथाकथित अराष्ट्रीयत्व की जिम्मेदारी मुझ पर न हो कर मुझे अराष्ट्रीय कहने वाले लोगों पर , उस राष्ट्र पर है । मेरे पाप के भागी वे हैं , मैं नहीं । "
मन्दिर प्रवेश के मुद्दे पर ......
" स्पृश्य हिन्दुओं से मेरा कहना है कि आप मन्दिर खोलें या न खोलें , इस पर सोच विचार आप करें । मैं उसके लिये आंदोलन नहीं करूंगा । मनुष्य के पवित्र व्यक्तित्व के प्रति सम्मान रखना आपको सभ्यता का लक्षण लगता है तो आप मन्दिर खोलें और सज्जन जैसा बर्ताव करें । सज्जन बनने की अपेक्षा अगर आपको हिन्दू जन के रूप में शेखी बघारना हो ,तो मन्दिर के द्वार बन्द करो और आत्मनाश करो ।........ जो धर्म असमानता का समर्थन करता है ,उसका विरोध करने का उन्होने निश्चय किया है । अगर हिन्दू धर्म को सामाजिक समता का धर्म बनना है तो उसके क़ानून में अस्पृश्यों को मन्दिरप्रवेश देने तक ही सुधार करना काफ़ी नहीं होगा । उसके लिये चातुर्वर्ण्य निर्मूलन कर उसकी शुद्धि करनी चाहिये ।समस्त असमानता का मूल चातुर्वर्ण्य है । चातुर्वर्ण्य अस्पृश्यता की जननी है क्योंकि जातिभेद और अस्पृश्यता असमानता के अन्य रूप हैं "
वीर सावरकर द्वारा अम्बेडकर को मन्दिर का उद्घाटन करने के निमंत्रण पर ....
"मैं पूर्व नियोजित काम काज की वजह से नहीं आ सकता । लेकिन आप समाज सुधार के क्षेत्र में काम कर रहे हैं उसके बारे में अनुकूल अभिप्राय देने का मौका मैं ले रहा हूं ।अगर अस्पृश्य वर्ग को हिन्दू साजा अभिन्न अंग होना है तो केवल अस्पृश्यता निर्मूलन हो कर नहीं चलेगा । चातुर्वर्ण्य का निर्मूलन होना चाहिये । जिन थोड़े लोगों को इसकी आवश्यकता महसूस हुयी है , उनमें से एक आप हैं , यह कहते हुये मुझे हर्ष होता है ।"
फ़रवरी 1942 मुम्बई के वागले हाल में ' पाकिस्तान विषयक विचार' पर उद्बोधन
"उनके साथ वाद विवाद करने में कोई अर्थ नहीं , जिन्हें पाकिस्तान एक चर्चा का विषय नहीं लगता । अगर उन्हें पाकिस्तान का निर्माण अन्यायकारी लगा होगा तो भविष्यकालीन पाकिस्तान उन्हें एक अत्यंत भयंकर घटना महसूस होगी । यह कहना ग़लत है कि इतिहास को भूल जाओ । जो इतिहास को भूलते हैं , वे इतिहास निर्माण नहीं कर सकेंगे । यह बात अक्ल की है कि भारतीय फौज में से मुसलमानों का प्रतिनिधत्व कम कर के उस फौज को एकीसवीं औरएकनिष्ठ करना ज़रूरी है । अपनी मातृभूमि की सुरक्षा हम ज़रूर करेंगे ...... मैं यह स्वीकार करता हूं कि स्पृश्य हिन्दुओं के साथ कुछ मुद्दों पर मेरा झगड़ा है ,लेकिन आपके सामने मैं यह प्रतिज्ञा करता हूं कि अपने देश की स्वतंत्रता सुरक्षित रखने के लिये मैं अपने प्राण न्योछावर करूंगा ।"
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Saturday, 8 March 2014
MUST WATCH !!!
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From: Kuldeep Singh Rajput <khulasanews@gmail.com>
Date: Sat, Mar 8, 2014 at 1:51 PM
Subject: ज़रूरी बहस , अपनी बात /रफ्तार टाइम न्यूज
To: horirajkumar.rajkumar@blogger.com, rajkumarsachanhori.indiachanges@blogger.com, horisardarpatel.indiachanges@bloger.com, horiindiachanges.changes@bloger.com, horisardar.patel@bloger.com
From: Kuldeep Singh Rajput <khulasanews@gmail.com>
Date: Sat, Mar 8, 2014 at 1:51 PM
Subject: ज़रूरी बहस , अपनी बात /रफ्तार टाइम न्यूज
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For further information you may call us any time.
Thanks for your kind Co-operation.
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Kind Regards!!!
Poet Kuldeep Singh Rajput (Aakash)
{Well known Film Producer, Director & Writer}
https://www.facebook.com/kuldeepsinghrajputonline
CMD @ SLCPL Productions at Kuldeep Singh Rajput
[https://www.facebook.com/ShubhamLifeCarepLimited & https://www.facebook.com/groups/SLCPLFAMILY/]
Expertise in making of Feature Films, Tele Films, Documentary Films, Corporate Films, Commercial Films, TV Serials, TV Shows & NEWS Contents etc.
Contact Details:
STUDIO : SANATAN TV, C-77, Sector-65, Noida, (U.P.) INDIA – 201301
C.O.: SUBHAM LIFE CARE (P) LIMITED, 115, First Floor, Om Nagar, Main G.T. Road, Mohan Nagar, Ghaziabad, (U.P.) INDIA - 201007
(24x7) Help Line: +91 9968 20 2264, +91 9350 990139.
Tele Fax: +91 120 433 2264.
E-mail: khulasanews@gmail.com, ceo@khulasanews.co.in, missionejournalism@gmail.com.
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मैं भी झेलूं , तू भी झेल
मैं भी झेलूं , तू भी झेल
---------------------
१--लूले अन्धे सत्ताकामी , मैं भी झेलूं ,तू भी झेल ।
प्रजातन्त्र के ये आसामी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।।
२--जब शासन में दु:शासन ,गान्धारी आँखों में पट्टी,
तब तब शकुनी कौड़ी कानी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
३--गान्धी गान्धी मुख से बोलें सत्य अहिंसा खाकर,
बापू के सुन्दर अनुगामी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
राज कुमार सचान होरी
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---------------------
१--लूले अन्धे सत्ताकामी , मैं भी झेलूं ,तू भी झेल ।
प्रजातन्त्र के ये आसामी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।।
२--जब शासन में दु:शासन ,गान्धारी आँखों में पट्टी,
तब तब शकुनी कौड़ी कानी, मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
३--गान्धी गान्धी मुख से बोलें सत्य अहिंसा खाकर,
बापू के सुन्दर अनुगामी ,मैं भी झेलूं तू भी झेल ।
राज कुमार सचान होरी
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KHULASA NEWS (Revealing the Facts…):बदलता भारत [INDIA CHANGES]
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MUST WATCH FOR YOUR OWN UPLIFTMENTS.... https://www.facebook.com/Zarooribahas/photos/a.512749978796255.1073741825.512620102142576/519066931497893/?type=1&theater...
Blog: KHULASA NEWS (Revealing the Facts…)
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Thursday, 6 March 2014
Fwd: Pik
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Begin forwarded message:
From: Kapil Sharma <kapilzsharma09@gmail.com>
Date: 6 March 2014 2:16:02 PM GMT+05:30
To: "horirajkumar@gmail.com" <horirajkumar@gmail.com>
Subject: Pik
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Sunday, 2 March 2014
सत्ता परिवर्तन के लिये ।
उन्हें सौंपे जो साकार करें सपना सरदार पटेल का , सशक्त भारत का । ऐसा एक ही है ....... मोदी
Thursday, 27 February 2014
राम तेरे नाम
राम तेरे नाम
०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
(१)
राम एक आराध्य थाम गतिमय होना ।
रोम रोम में राम बीज प्रतिपल बोना ।।
जीवन स्वर्णिम होगा रे मन धीरज रख ,
राम नाम जप ,मनवा ;प्रातः शाम ।।
००००००००००००००००००००००००००००००
(२)
आश और विश्वास स्वयं में राम सिखाता ।
अन्धकार में पथ प्रकाश का राम दिखाता ।।
चलता रह बस ,चलता रह रे मन अविचल,
निष्काम भाव मन करता रह तू काम ।। राम नाम जप----
००००००००००००००००००००००००००००००००
(३)
कितने आये गये नाम ले तेरा बस ।
अपना भी तो कुछ पल का है डेरा बस ।।
बस तुम जाना नाम अमर कर इस उस जग,
निश्चिंत भाव से जाना फिर उस धाम ।। राम नाम जप ----
००००००००००००००००००००००००००००००००००
(४)
आना जाना नाट्य मन्च के दृश्य मनोहर ।
अपने अपने पाठ पूर्ण कर जाते उस घर ।।
बिना मोह भ्रम रे मन ,जीवन यापन कर ,
"होरी" जाना कह कह कह हे राम !! राम नाम जप ---
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
राज कुमार सचान "होरी"
कवि, साहित्यकार ,वक्ता
राष्ट्रीय संयोजक ----India changes( बदलता भारत )
email - rajkumarsachanhori@gmail.com , horiindiachanges@gmail.com , www.indiachanges.com ,http// horibadaltabharat.blogspot.com http//pateltimes.blogspot.com
राम नवमी के अवसर पर प्रकाशन हेतु प्रेषित ।
राज कुमार सचान "होरी"
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०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
(१)
राम एक आराध्य थाम गतिमय होना ।
रोम रोम में राम बीज प्रतिपल बोना ।।
जीवन स्वर्णिम होगा रे मन धीरज रख ,
राम नाम जप ,मनवा ;प्रातः शाम ।।
००००००००००००००००००००००००००००००
(२)
आश और विश्वास स्वयं में राम सिखाता ।
अन्धकार में पथ प्रकाश का राम दिखाता ।।
चलता रह बस ,चलता रह रे मन अविचल,
निष्काम भाव मन करता रह तू काम ।। राम नाम जप----
००००००००००००००००००००००००००००००००
(३)
कितने आये गये नाम ले तेरा बस ।
अपना भी तो कुछ पल का है डेरा बस ।।
बस तुम जाना नाम अमर कर इस उस जग,
निश्चिंत भाव से जाना फिर उस धाम ।। राम नाम जप ----
००००००००००००००००००००००००००००००००००
(४)
आना जाना नाट्य मन्च के दृश्य मनोहर ।
अपने अपने पाठ पूर्ण कर जाते उस घर ।।
बिना मोह भ्रम रे मन ,जीवन यापन कर ,
"होरी" जाना कह कह कह हे राम !! राम नाम जप ---
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
राज कुमार सचान "होरी"
कवि, साहित्यकार ,वक्ता
राष्ट्रीय संयोजक ----India changes( बदलता भारत )
email - rajkumarsachanhori@gmail.com , horiindiachanges@gmail.com , www.indiachanges.com ,http// horibadaltabharat.blogspot.com http//pateltimes.blogspot.com
राम नवमी के अवसर पर प्रकाशन हेतु प्रेषित ।
राज कुमार सचान "होरी"
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Monday, 5 August 2013
ओउम् नम:शिवाय
ओउम् नम:शिवाय
(शिव रात्रि पर )
यह शिव रात्रि तुम्हारे जीवन, की घुप रात्रि मिटा दे ।
सुख सम्पत्ति प्रवेश करे गृह ,दुख दारिद्रय मिटा दे ।।
शिव त्रिनेत्रधारी हर कर हर दुख भव पार करे ,
दे सतयुग तुझको ,तेरा हर कलियुग पूर्ण घटा दे ।।
हर हर बम बम शिव शिव कह कह बोलें नम: शिवाय ।।
ओउम् नम: शिवाय । ओउम् नम: शिवाय ।।
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(शिव रात्रि पर )
यह शिव रात्रि तुम्हारे जीवन, की घुप रात्रि मिटा दे ।
सुख सम्पत्ति प्रवेश करे गृह ,दुख दारिद्रय मिटा दे ।।
शिव त्रिनेत्रधारी हर कर हर दुख भव पार करे ,
दे सतयुग तुझको ,तेरा हर कलियुग पूर्ण घटा दे ।।
हर हर बम बम शिव शिव कह कह बोलें नम: शिवाय ।।
ओउम् नम: शिवाय । ओउम् नम: शिवाय ।।
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Wednesday, 31 July 2013
मिड डे मील ( MDM)
मिड डे मील ( MDM)
समस्यायें और निराकरण
०००००००००००००००००००००००
इतिहास ----
1962-63 तमिलनाडु प्रथम राज्य ।गुजरात 2nd 1984 ।केरल भी 1984 3rd
-----------------------------------------------------------------------
28 नवम्बर 2001 सुप्रीम कोर्ट आदेश पकाया खाना अनिवार्य cooked food mandatory .
------------------------------------------------------------------------------------
मानक----- प्राइमरी --- 450 कैलोरी 12 ग्राम प्रोटीन । जूनियर -- 700 कैलोरी 20 ग्राम प्रोटीन ।
----------------------------------------------------------------------------------------
बजट आवंटन -- 2007-08-----7,324 करोड़
2013-14 ------ 13,215 करोड़
०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
कुछ दुर्घटनायें ----
--------------
1- बिहार के सारण ज़िले में ---धरमसती गंडामन गाँव स्थित स्कूल में जहरीला मिड डेमील । 16 जुलाई । 23 बच्चों की मौत । फारेंसिक साइंस लैब की जाँच में ते ल में जहरीला पदार्थ --- आरगैनो फास्फेट ।
प्रधानाध्यापिका मीणादेवी छपरा से गिरफ्तार ।
-----------------------------
घटना का राजनीतिक करण । दलों में सिर फुटौवल ।
०००००००००००००००००००००००००००००००००००
2--- मुरादाबाद के एक ग्राम के स्कूल में मेंढक पकाया । चार की हालत बिगड़ी ।प्रधानाध्यपक निलंबित ।
3--- पलवल ,हरियाणा --- छिपकली
4- धूले , महाराष्ट्र ।
5- निवेली, तमिलनाडु ।
6- in Bhopal panchayat official tries to poison 50kids in a school . Times of India 26 July , new Delhi .
7-1.5 crore kids go hungry as Bihar teachers shun meal duties . 70,200 schools .
8- teachers should not be in kitchens -- HC ALLD . DOUBLE BENCH.
Next hearing on 5th August .
9- उ प्र ने वापस किये 221 करोड़ 2013 में ,खर्च नहीं किये ।
०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
1- भोजन की गुणवत्ता । बिना मिलावट और मानकों के अनुरूप ।
2- शिक्षा के स्तर पर गिरावट । मैने स्वयं सीडीओ के रूप में देखा है । यूपी में ।
3- भ्रष्टाचार . अधिक बच्चे दिखा कर भुगतान
4- मिड डे मील की कम मात्रा
5- किचेन तथा अन्य स्थलों की कमी ।
6- अनुपयुक्त कर्मचारी - उत्तरदायित्व की कमी ।
7- अनुश्रवण की कमी और कारगर व्यवस्था का अभाव ।
8- बजट का समय से उपभोग नहीं ।
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
समाधान के उपाय ---
1- माँ के बैंक एकाउंट में बच्चे के मिड डे मील का पैसा ट्रान्सफर किया जाय ।
2- स्कूल में रोटेशन से बच्चों की माताओं की देख रेख में खाना बने इसके लिये उन्हे मानदेय भी दिया जाये ।
3-उपयुक्त और कारगर समीक्षा (monitoring )
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समस्यायें और निराकरण
०००००००००००००००००००००००
इतिहास ----
1962-63 तमिलनाडु प्रथम राज्य ।गुजरात 2nd 1984 ।केरल भी 1984 3rd
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28 नवम्बर 2001 सुप्रीम कोर्ट आदेश पकाया खाना अनिवार्य cooked food mandatory .
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मानक----- प्राइमरी --- 450 कैलोरी 12 ग्राम प्रोटीन । जूनियर -- 700 कैलोरी 20 ग्राम प्रोटीन ।
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बजट आवंटन -- 2007-08-----7,324 करोड़
2013-14 ------ 13,215 करोड़
०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
कुछ दुर्घटनायें ----
--------------
1- बिहार के सारण ज़िले में ---धरमसती गंडामन गाँव स्थित स्कूल में जहरीला मिड डेमील । 16 जुलाई । 23 बच्चों की मौत । फारेंसिक साइंस लैब की जाँच में ते ल में जहरीला पदार्थ --- आरगैनो फास्फेट ।
प्रधानाध्यापिका मीणादेवी छपरा से गिरफ्तार ।
-----------------------------
घटना का राजनीतिक करण । दलों में सिर फुटौवल ।
०००००००००००००००००००००००००००००००००००
2--- मुरादाबाद के एक ग्राम के स्कूल में मेंढक पकाया । चार की हालत बिगड़ी ।प्रधानाध्यपक निलंबित ।
3--- पलवल ,हरियाणा --- छिपकली
4- धूले , महाराष्ट्र ।
5- निवेली, तमिलनाडु ।
6- in Bhopal panchayat official tries to poison 50kids in a school . Times of India 26 July , new Delhi .
7-1.5 crore kids go hungry as Bihar teachers shun meal duties . 70,200 schools .
8- teachers should not be in kitchens -- HC ALLD . DOUBLE BENCH.
Next hearing on 5th August .
9- उ प्र ने वापस किये 221 करोड़ 2013 में ,खर्च नहीं किये ।
०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
1- भोजन की गुणवत्ता । बिना मिलावट और मानकों के अनुरूप ।
2- शिक्षा के स्तर पर गिरावट । मैने स्वयं सीडीओ के रूप में देखा है । यूपी में ।
3- भ्रष्टाचार . अधिक बच्चे दिखा कर भुगतान
4- मिड डे मील की कम मात्रा
5- किचेन तथा अन्य स्थलों की कमी ।
6- अनुपयुक्त कर्मचारी - उत्तरदायित्व की कमी ।
7- अनुश्रवण की कमी और कारगर व्यवस्था का अभाव ।
8- बजट का समय से उपभोग नहीं ।
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
समाधान के उपाय ---
1- माँ के बैंक एकाउंट में बच्चे के मिड डे मील का पैसा ट्रान्सफर किया जाय ।
2- स्कूल में रोटेशन से बच्चों की माताओं की देख रेख में खाना बने इसके लिये उन्हे मानदेय भी दिया जाये ।
3-उपयुक्त और कारगर समीक्षा (monitoring )
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Friday, 26 July 2013
" ज़रूरी बहस "
" ज़रूरी बहस "
रफ्तार न्यूज़ चैनेल पर प्रत्येक रविवार और गुरुवार
रात्रि 9 बजे से 9.40 बजे तक ।
आपके लिये , हमारे लिये और सबसे अधिक सम्पूर्ण राष्ट्र के लिये ज़रूरी विषयों पर सार्थक बहस-- "ज़रूरी बहस "
बहस का संचालन करेंगे प्रसिद्ध कवि , लेखक , प्रखर वक्ता और समाजसेवी --राज कुमार सचान" होरी"
"अपनी बात "
राज कुमार सचान "होरी"के साथ
रफ्तार न्यूज़ चैनल पर ही ठीक ज़रूरी बहस के तुरन्त बाद
रात्रि 9.40 बजे से 10 बजे तक --प्रत्येक रविवार और गुरुवार
इसमें हम साक्षात्कार करेंगे महत्वपूर्ण व्यक्तियों का जिनकी उपलब्धियों से आप ले सकते हैं प्रेरणा ।
विशेष -- इन दोनो कार्यक्रमों में आप भाग भी ले सकते हैं --- महत्वपूर्ण दर्शक , वक्ता या साक्षात्कार व्यक्तित्व के रूप में ।
आप अपना विज्ञापन भी दे सकते हैं ।
सम्पर्क----
09350990139 (Rajput ), 08938841199(Hori), 08800228509(Rohit ), 09910906545(Tyagi), 09810162266(Vikash)
Emails - indiachanges2012@gmail.com , indiachanges2013@gmail.com , horiindiachanges@gmail.com
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रफ्तार न्यूज़ चैनेल पर प्रत्येक रविवार और गुरुवार
रात्रि 9 बजे से 9.40 बजे तक ।
आपके लिये , हमारे लिये और सबसे अधिक सम्पूर्ण राष्ट्र के लिये ज़रूरी विषयों पर सार्थक बहस-- "ज़रूरी बहस "
बहस का संचालन करेंगे प्रसिद्ध कवि , लेखक , प्रखर वक्ता और समाजसेवी --राज कुमार सचान" होरी"
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Thursday, 4 July 2013
Tuesday, 18 June 2013
बदलता भारत
बदलता भारत
-------------
धर्म निरपेक्षता शब्द का अर्थ हमारे नेताओं को इतना ही पता है कि जो और जब उन्हे सुविधाजनक लगे वही धर्मनिरपेक्ष है । कश्मीर में इसका अर्थ बाकी देश से कुछ जुदा है । वहाँ अल्प संख्यकों में सिख , ईसाई , जैन , सनातनी आते हैं परन्तु उनको क्या अल्पसंख्यकों वाली सुविधायें वहाँ प्राप्त हैं?
असल में कोई भी राजनीति धर्म सापेक्षता की होनी ही नहीं चाहिये । धर्म के आधार पर न तो किसी का विरोध और न तो किसी का समर्थन -- यह सिद्धान्त होना चाहिये । लेकिन वोटों के लिये जाति , धर्म के जितने दुरुपयोग किये जा रहे हैं उतने शायद अन्य के नहीं । यह दुख:द है कि फिर अगर देश का क्षरण हुआ तो उसकी जड़ में ये दोनों ही होंगे ।
आइये चेतें , लोकतंत्र को , देश को जिन्दा रखने के लिये घटिया नेतागीरी और सिद्धान्तहीन स्वार्थों से बाज आयें ।राष्ट्र को क्षरण से बचायें ।
India Changes ( बदलता भारत )
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-------------
धर्म निरपेक्षता शब्द का अर्थ हमारे नेताओं को इतना ही पता है कि जो और जब उन्हे सुविधाजनक लगे वही धर्मनिरपेक्ष है । कश्मीर में इसका अर्थ बाकी देश से कुछ जुदा है । वहाँ अल्प संख्यकों में सिख , ईसाई , जैन , सनातनी आते हैं परन्तु उनको क्या अल्पसंख्यकों वाली सुविधायें वहाँ प्राप्त हैं?
असल में कोई भी राजनीति धर्म सापेक्षता की होनी ही नहीं चाहिये । धर्म के आधार पर न तो किसी का विरोध और न तो किसी का समर्थन -- यह सिद्धान्त होना चाहिये । लेकिन वोटों के लिये जाति , धर्म के जितने दुरुपयोग किये जा रहे हैं उतने शायद अन्य के नहीं । यह दुख:द है कि फिर अगर देश का क्षरण हुआ तो उसकी जड़ में ये दोनों ही होंगे ।
आइये चेतें , लोकतंत्र को , देश को जिन्दा रखने के लिये घटिया नेतागीरी और सिद्धान्तहीन स्वार्थों से बाज आयें ।राष्ट्र को क्षरण से बचायें ।
India Changes ( बदलता भारत )
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Thursday, 13 June 2013
Fwd: volume-2 : topiyon ke badlate rang- sansmaran of H.S.Verma
---------- Forwarded message ----------
From: Harnam Singh Verma
Date: Wednesday, May 22, 2013
Subject: volume-2 : topiyon ke badlate rang- sansmaran of H.S.Verma
To: Sardar Patel <horisardarpatel@gmail.com>
Cc: Dakhal Prakashan <dakhalprakashan@gmail.com>
dear sir/madam,
i am sending the volume 2 of my sansmaran topiyon ke badalte rang for you to do the needful. please acknowledge its receipt.Sunday, 9 June 2013
आत्म कथ्य
आत्म कथ्य
-----------------------------राज कुमार सचान होरी -राष्ट्रीय संयोजक बदलता भारत(India Changes)
भय कहाँ मुझको कभी , असिधार में चलता हूं मैं ,
तुम किनारों से चलो ,मझधार में चलता हूं मैं ।
माँ शारदे ने है दिया अधिकार मुझको लेखनी का ,
"होरी" बना ,नित दर्द के संसार में चलता हूं मैं ।।
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-----------------------------राज कुमार सचान होरी -राष्ट्रीय संयोजक बदलता भारत(India Changes)
भय कहाँ मुझको कभी , असिधार में चलता हूं मैं ,
तुम किनारों से चलो ,मझधार में चलता हूं मैं ।
माँ शारदे ने है दिया अधिकार मुझको लेखनी का ,
"होरी" बना ,नित दर्द के संसार में चलता हूं मैं ।।
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Wednesday, 5 June 2013
कैंडिल मार्च क्यों ???
कैंडिल मार्च क्यों ???
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
भाइयों एवं बहनों,
देश में जनसंख्या विष्फोटक स्थिति पर पहुँच चुकी है जो आज देश की सारी प्रगति को दीमक की तरह चाट रही है ।इसी बढ़ती जनसंख्या के कारण आज शहरों में चलना दूभर है , चारों ओर जाम ही जाम । अगर हम अभी नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं जब सारे शहर केवल भीड़भाड़ वाले मेलों में तब्दील हो जायेंगे और हम एक स्थान से दूसरे स्थान तक मेलों की भाँति केवल पैदल ही पहुँच पायेंगे ।
जनसंख्या नियंत्रण के लिये जागरूकता कार्यक्रम सरकारों द्वारा चलाये जाते रहे लेकिन आंकडे़ सामने हैं । कभी गंभीरता से चिन्तन करिये तो पायेंगे ,राष्ट्र के भविष्य के लिये यक्ष प्रश्न खड़ी करती है जनसंख्या । जिस देश की अधिसंख्य आबादी कुपोषण से ग्रस्त, अशिक्षित , बेरोजगार ,ग़रीब हो उस देश से आशा भी क्या की जा सकती है ?
हमारी जनसंख्या का घनत्व ग़रीबी के मध्य सर्वाधिक है । ग़रीबी और आबादी एक दूसरे के पूरक हैं , अन्योन्याश्रित हैं । देश की युवा फौज का 80% अंश ग़रीब परिवारों से है जो स्वयं साधन हीन है ,वे देश के विकास में कितनी भागीदारी निभायेंगे ? जनसंख्यावृद्धि धर्म , सम्प्रदाय , जाति से जोड़ कर देखना एक गंभीर भूल है , समस्या से मुँह मोड़ना है । ग़रीबों की स्थितियां ही ऐसी होती हैं कि उन्हीं के बीच जनसंख्या तेज़ी से फलती फूलती है ।
ग्रामीण क्षेत्रों की बढ़ती जनसंख्या पलायन कर शहरों में आ बसती है ।इनमें से अधिकांश स्लम या झुग्गी झोपड़ी में रहती है । नगर दिन पर दिन विष्फोटक स्थिति में पहुँच रहे हैं ।
एक बात यहाँ गंभीरता से समझनी होगी ----- नेताओं, राजनीतिक दलों और धनाड्यों को जनसंख्या बढ़ने से लाभ है -----एक को भारी संख्या में मतदाता मिलते हैं तो दूसरे को मिलते हैं उपभोक्ता और सस्ते श्रमिक । इसलिये राष्ट्र को अपूरणीय क्षति पहुँचाने वाली इस समस्या से हमें ही जूझना होगा । जागरूकता पैदा करने के साथ साथ हमें आन्दोलन चलाने होंगे ---- एक सक्षम क़ानून के लिये । हिन्दू , मुस्लिम , सिख ,ईसाई आदि सभी को कंधे से कंधा मिला कर । चीन का उदाहरण हमारे सामने है । ग़रीब के हित में और राष्ट्र के हित में इस देश को एक न एक दिन "जनसंख्या नियंत्रण अधिनियम "बनाना होगा और देश को अपूरणीय क्षति से बचाना होगा ।
हम कैंडिल मार्च से देश का ध्यान खींचना चाहते हैं और देश की संसद से माँग करते हैं कि शीघ्र ही इस आशय का बिल संसद में लाये और समुचित प्रावधानों के साथ उसे शीघ्र पारित करे ।आइये ,भारत बदलना चाहता है -- समय की माँग है -- बस हम खुले मन से साथ दें ।
बदलता भारत( INDIA CHANGES ) की अनेक माँगे हैं जिनके लिये हम संघर्षरत हैं और उनमें से एक है ---- जनसंख्या नियंत्रण के लिये सक्षम क़ानून की माँग । क़ानून जो सबके लिये समान हो ,कोई दबाव नहीं , जोरजबरदस्ती नहीं --बस एक क़ानून हम सबके लिये ।
आइये जनसंख्या नियंत्रण क़ानून बनवाने के लिये 8 जून 2013 को हम मिल कर कैंडिल मार्च निकाल कर जन जागृति पैदा करे़ और संसद तक अपनी बात पहुंचायें ।
''जनसंख्या के सैलाब में बह न जायें हम कहीं ,
क़ानून की पतवार अब , हाथ में ले लीजिये ।
'होरी' अभी भी है समय कुछ चेतिये,उठ बैठिये ,
डूबने से पूर्व ,जिन्दा कौ़म हैं , कुछ कीजिये ।।'' आपका साथी
राज कुमार सचान 'होरी'
राष्ट्रीय संयोजक
दिनांक --25 मई 2013 INDIA CHANGES (बदलता भारत )
Facebook.com/pages/ India changes , Facebook.com/ group/ India changes , www.indiachanges.com , indiachanges2013.blogspot.com , indiachanges2020.blogspot.com , horibadaltabharat.blogspot.com
Emails ---indiachanges2012@gmail.com , indiachanges2013@gmail.com
Delhi office --- 182/3 गुरु कृपा एपार्टममेंट , ग्राउंड फ्लोर , महरौली ,नई दिल्ली -30 ,, ग़ाज़ियाबाद कार्यालय --63 NITI KHAND 3rd ,Indirapuram Gzb
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भाइयों एवं बहनों,
देश में जनसंख्या विष्फोटक स्थिति पर पहुँच चुकी है जो आज देश की सारी प्रगति को दीमक की तरह चाट रही है ।इसी बढ़ती जनसंख्या के कारण आज शहरों में चलना दूभर है , चारों ओर जाम ही जाम । अगर हम अभी नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं जब सारे शहर केवल भीड़भाड़ वाले मेलों में तब्दील हो जायेंगे और हम एक स्थान से दूसरे स्थान तक मेलों की भाँति केवल पैदल ही पहुँच पायेंगे ।
जनसंख्या नियंत्रण के लिये जागरूकता कार्यक्रम सरकारों द्वारा चलाये जाते रहे लेकिन आंकडे़ सामने हैं । कभी गंभीरता से चिन्तन करिये तो पायेंगे ,राष्ट्र के भविष्य के लिये यक्ष प्रश्न खड़ी करती है जनसंख्या । जिस देश की अधिसंख्य आबादी कुपोषण से ग्रस्त, अशिक्षित , बेरोजगार ,ग़रीब हो उस देश से आशा भी क्या की जा सकती है ?
हमारी जनसंख्या का घनत्व ग़रीबी के मध्य सर्वाधिक है । ग़रीबी और आबादी एक दूसरे के पूरक हैं , अन्योन्याश्रित हैं । देश की युवा फौज का 80% अंश ग़रीब परिवारों से है जो स्वयं साधन हीन है ,वे देश के विकास में कितनी भागीदारी निभायेंगे ? जनसंख्यावृद्धि धर्म , सम्प्रदाय , जाति से जोड़ कर देखना एक गंभीर भूल है , समस्या से मुँह मोड़ना है । ग़रीबों की स्थितियां ही ऐसी होती हैं कि उन्हीं के बीच जनसंख्या तेज़ी से फलती फूलती है ।
ग्रामीण क्षेत्रों की बढ़ती जनसंख्या पलायन कर शहरों में आ बसती है ।इनमें से अधिकांश स्लम या झुग्गी झोपड़ी में रहती है । नगर दिन पर दिन विष्फोटक स्थिति में पहुँच रहे हैं ।
एक बात यहाँ गंभीरता से समझनी होगी ----- नेताओं, राजनीतिक दलों और धनाड्यों को जनसंख्या बढ़ने से लाभ है -----एक को भारी संख्या में मतदाता मिलते हैं तो दूसरे को मिलते हैं उपभोक्ता और सस्ते श्रमिक । इसलिये राष्ट्र को अपूरणीय क्षति पहुँचाने वाली इस समस्या से हमें ही जूझना होगा । जागरूकता पैदा करने के साथ साथ हमें आन्दोलन चलाने होंगे ---- एक सक्षम क़ानून के लिये । हिन्दू , मुस्लिम , सिख ,ईसाई आदि सभी को कंधे से कंधा मिला कर । चीन का उदाहरण हमारे सामने है । ग़रीब के हित में और राष्ट्र के हित में इस देश को एक न एक दिन "जनसंख्या नियंत्रण अधिनियम "बनाना होगा और देश को अपूरणीय क्षति से बचाना होगा ।
हम कैंडिल मार्च से देश का ध्यान खींचना चाहते हैं और देश की संसद से माँग करते हैं कि शीघ्र ही इस आशय का बिल संसद में लाये और समुचित प्रावधानों के साथ उसे शीघ्र पारित करे ।आइये ,भारत बदलना चाहता है -- समय की माँग है -- बस हम खुले मन से साथ दें ।
बदलता भारत( INDIA CHANGES ) की अनेक माँगे हैं जिनके लिये हम संघर्षरत हैं और उनमें से एक है ---- जनसंख्या नियंत्रण के लिये सक्षम क़ानून की माँग । क़ानून जो सबके लिये समान हो ,कोई दबाव नहीं , जोरजबरदस्ती नहीं --बस एक क़ानून हम सबके लिये ।
आइये जनसंख्या नियंत्रण क़ानून बनवाने के लिये 8 जून 2013 को हम मिल कर कैंडिल मार्च निकाल कर जन जागृति पैदा करे़ और संसद तक अपनी बात पहुंचायें ।
''जनसंख्या के सैलाब में बह न जायें हम कहीं ,
क़ानून की पतवार अब , हाथ में ले लीजिये ।
'होरी' अभी भी है समय कुछ चेतिये,उठ बैठिये ,
डूबने से पूर्व ,जिन्दा कौ़म हैं , कुछ कीजिये ।।'' आपका साथी
राज कुमार सचान 'होरी'
राष्ट्रीय संयोजक
दिनांक --25 मई 2013 INDIA CHANGES (बदलता भारत )
Facebook.com/pages/ India changes , Facebook.com/ group/ India changes , www.indiachanges.com , indiachanges2013.blogspot.com , indiachanges2020.blogspot.com , horibadaltabharat.blogspot.com
Emails ---indiachanges2012@gmail.com , indiachanges2013@gmail.com
Delhi office --- 182/3 गुरु कृपा एपार्टममेंट , ग्राउंड फ्लोर , महरौली ,नई दिल्ली -30 ,, ग़ाज़ियाबाद कार्यालय --63 NITI KHAND 3rd ,Indirapuram Gzb
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Monday, 3 June 2013
तुम्हारी ऐसी तैसी
तुम्हारी ऐसी तैसी
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
१--कहो जी मन में बैठा चोर, तुम्हारी ऐसी तैसी ।
और फिर खुद ही करते शोर , तुम्हारी ऐसी तैसी ।।
--------------------------------------------
२--कंठी माला तिलक जोगिया वस्त्र धरे,
अन्तस् पापी घट घनघोर ,तुम्हारी ऐसी तैसी ।
----------------------------------------
३---देख और घनघोर घटायें ,क्यों पाँव कांपते ,
और फिर नाचो बन कर मोर , तुम्हारी ऐसी तैसी ।
--------------------------------------------
४--वाक्य बनाते गिरगिट से करते शब्दों के खेल ,
कवि तुम खुद ही भाव विभोर ,तुम्हारी ऐसी तैसी ।
------------------------------------------
५--बार बार सुन चुके तुम्हारी यह कविता तुमसे ,
अमां फिर करते हो बोर ,तुम्हारी ऐसी तैसी ।
-------------------------------------------
६--पतंग उड़ा आकाश दिखाना शगल तुम्हारा,
काटते छुप छुप कर खुद डोर,तुम्हारी ऐसी तैसी ।।
-------------------------------------------
७--कठपुतली से मंदिर मस्जिद गिरजाघर गुरुद्वारे,
ओट से खुदी नचाते डोर , तुम्हारी ऐसी तैसी ।
-------------------------------------------
८--तुम सबने चूसा था उसको जब तक वह था जीवित,
अब कफ़न बाँट की होड़ , तुम्हारी ऐसी तैसी ।
-----------------------------------------------
९--दिल्ली रानी राज कर रही देश धंस रहा दलदल में ,
बिल्ली सी बनी चटोर , तुम्हारी ऐसी तैसी ।
----------------------------------------------
१०--माना तुम हो बड़े आदमी पूछ तुम्हारी ,
"होरी" आदत से पर ढोर, तुम्हारी ऐसी तैसी ।
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
राज कुमार सचान "होरी"
विशेष --- 1991 में लिखी मेरी यह ग़ज़ल काव्यमंचों की मेरी पहचान बनी थी ।कभी दरबार हाल ,राजभवन , लखनऊ में तहलका मचाया था । फेसबुकीय मित्रों को समर्पित ---तुम्हारी ऐसी तैसी , इस निवेदन के साथ कि इसमें कही गई कोई भी बात आपके लिये नहीं परन्तु यदि कोई भी बात आप पर सत्य बैठे तो यह महज़ संयोग होगा ,"तुम्हारी ऐसी तैसी " नहीं ।
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१--कहो जी मन में बैठा चोर, तुम्हारी ऐसी तैसी ।
और फिर खुद ही करते शोर , तुम्हारी ऐसी तैसी ।।
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२--कंठी माला तिलक जोगिया वस्त्र धरे,
अन्तस् पापी घट घनघोर ,तुम्हारी ऐसी तैसी ।
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३---देख और घनघोर घटायें ,क्यों पाँव कांपते ,
और फिर नाचो बन कर मोर , तुम्हारी ऐसी तैसी ।
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४--वाक्य बनाते गिरगिट से करते शब्दों के खेल ,
कवि तुम खुद ही भाव विभोर ,तुम्हारी ऐसी तैसी ।
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५--बार बार सुन चुके तुम्हारी यह कविता तुमसे ,
अमां फिर करते हो बोर ,तुम्हारी ऐसी तैसी ।
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६--पतंग उड़ा आकाश दिखाना शगल तुम्हारा,
काटते छुप छुप कर खुद डोर,तुम्हारी ऐसी तैसी ।।
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७--कठपुतली से मंदिर मस्जिद गिरजाघर गुरुद्वारे,
ओट से खुदी नचाते डोर , तुम्हारी ऐसी तैसी ।
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८--तुम सबने चूसा था उसको जब तक वह था जीवित,
अब कफ़न बाँट की होड़ , तुम्हारी ऐसी तैसी ।
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९--दिल्ली रानी राज कर रही देश धंस रहा दलदल में ,
बिल्ली सी बनी चटोर , तुम्हारी ऐसी तैसी ।
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१०--माना तुम हो बड़े आदमी पूछ तुम्हारी ,
"होरी" आदत से पर ढोर, तुम्हारी ऐसी तैसी ।
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
राज कुमार सचान "होरी"
विशेष --- 1991 में लिखी मेरी यह ग़ज़ल काव्यमंचों की मेरी पहचान बनी थी ।कभी दरबार हाल ,राजभवन , लखनऊ में तहलका मचाया था । फेसबुकीय मित्रों को समर्पित ---तुम्हारी ऐसी तैसी , इस निवेदन के साथ कि इसमें कही गई कोई भी बात आपके लिये नहीं परन्तु यदि कोई भी बात आप पर सत्य बैठे तो यह महज़ संयोग होगा ,"तुम्हारी ऐसी तैसी " नहीं ।
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Saturday, 1 June 2013
क्रिकेट छोड़ो --देश बचाओ ----एक मुहिम
क्रिकेट छोड़ो --देश बचाओ ----एक मुहिम
००००००००००
---------------------------------------
राज कुमार सचान 'होरी' --राष्ट्रीय अध्यक्ष --बदलता भारत ( India Changes )
आपको सर्वप्रथम इंग्लैंड के इतिहास की ओर ले चलता हूं जिसके लिये कहा जाता था कि उसके राज्य में सूर्य नहीं डूबता था । था भी सत्य क्योंकि उसका राज्य सम्पूर्ण विश्व में फैला हुआ था । जब अंग्रेज चरम उत्कर्ष पर थे तभी उन्होने क्रिकेट खेल का आविष्कार किया और ब्रिटेन में " मेरिलबोन क्रिकेट क्लब " (M.C.C) की स्थापना की । यह विस्तृत शोध का विषय है एक ओर क्रिकेट का उत्थान होता रहा दूसरी ओर अंग्रेजों की सत्ता का पतन ।अंग्रेज कौ़म क्रिकेट खेलने में व्यस्त हो गई और धीरे धीरे वह राज करने के तरीके भूल गई । आलम यह कि क्रिकेट के उच्चतम स्तर तक पहुचते पहुँचते अंग्रेज निम्न स्तर पर आ गये और अंग्रेजों का सूरज सदा सदा के लिये डूब गया । अब हमारी बारी है ।
क्रिकेट और जुयें( gambling ) में समानतायें इस कदर हैं कि आप इसे खेल नहीं अपितु एक जुआं ही कह सकते हैं ।जुयें( gambling ) में कर्म , ज्ञान से अधिक स्थान भाग्य का होता है । अनिश्चितता के इस खेल को खेल जुयें का तो कहा जा सकता है game या sport नहींं । तभी fixing का बादशाह ही क्रिकेट है क्योंकि क्रिकेट स्वयं gambling है । पूरा का पूरा देश जुयें में लग गया कोई खेलने में तो कोई देखने में । अब इससे ईश्वर ही बचा सकता है ।
खेलों के मुकाबले जुयें में मनोरंजन अधिक होता है यह सर्वमान्य तथ्य है तभी क्रिकेट में अन्य खेलों के मुकाबले मनोरंजन का खजाना खुला रहता है । काम धन्धा छोड़ पूरा देश उसी में व्यस्त ०००विद्यार्थी अध्यापक, दुकानदार खरीददार , मज़दूर मालिक , नेता जनता --- पूरा देश आकंठ डूबा ।
सर्वे करिये देश के प्रत्येक नागरिक के कितने काम के घंटे वर्ष भर में क्रिकेट में स्वाहा होते हैं । पूरे देश को कितनी क्षति होती है ?? भारत जैसे विकासशील देश में समय की यह बरबादी हमें ग़रीब बनाने के लिये काफ़ी है ।
हम इंग्लैंड और अंग्रेजों के इतिहास से अगर सबक न ले सके तो हमें डूबने से कोई बचा न सकेगा हमारा भगवान भी नहीं ।जब इंग्लैंड जैसा देश जिसके राज्य में सूरज नहीं डूबता था एक कोने में सिमट कर रह गया , पूरी तरह बिखर गया तब हमारी क्या बिसात ? हम तो वैसे ही कमज़ोर हैं , हम क्रिकेट के धक्के को कतई बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे ।
आइये "क्रिकेट छोड़ें -देश बचायें --एक मुहिम " में हमारा साथ दें । भारत को एक संभावित मुसीबत से उबारें ।। देशप्रेमी , राष्ट्रभक्त साथियों ! आयें भारत बचायें ।।
बदलता भारत(India Changes) आपके साथ ।।
राज कुमार सचान "होरी"
राष्ट्रीय अध्यक्ष --बदलता भारत
www.indiachanges.com , indiachanges2012.blogspot.com , indiachanges2013.blogspot.com , indiachanges2020.blogspot.com , Facebook / pages / India changes
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राज कुमार सचान 'होरी' --राष्ट्रीय अध्यक्ष --बदलता भारत ( India Changes )
आपको सर्वप्रथम इंग्लैंड के इतिहास की ओर ले चलता हूं जिसके लिये कहा जाता था कि उसके राज्य में सूर्य नहीं डूबता था । था भी सत्य क्योंकि उसका राज्य सम्पूर्ण विश्व में फैला हुआ था । जब अंग्रेज चरम उत्कर्ष पर थे तभी उन्होने क्रिकेट खेल का आविष्कार किया और ब्रिटेन में " मेरिलबोन क्रिकेट क्लब " (M.C.C) की स्थापना की । यह विस्तृत शोध का विषय है एक ओर क्रिकेट का उत्थान होता रहा दूसरी ओर अंग्रेजों की सत्ता का पतन ।अंग्रेज कौ़म क्रिकेट खेलने में व्यस्त हो गई और धीरे धीरे वह राज करने के तरीके भूल गई । आलम यह कि क्रिकेट के उच्चतम स्तर तक पहुचते पहुँचते अंग्रेज निम्न स्तर पर आ गये और अंग्रेजों का सूरज सदा सदा के लिये डूब गया । अब हमारी बारी है ।
क्रिकेट और जुयें( gambling ) में समानतायें इस कदर हैं कि आप इसे खेल नहीं अपितु एक जुआं ही कह सकते हैं ।जुयें( gambling ) में कर्म , ज्ञान से अधिक स्थान भाग्य का होता है । अनिश्चितता के इस खेल को खेल जुयें का तो कहा जा सकता है game या sport नहींं । तभी fixing का बादशाह ही क्रिकेट है क्योंकि क्रिकेट स्वयं gambling है । पूरा का पूरा देश जुयें में लग गया कोई खेलने में तो कोई देखने में । अब इससे ईश्वर ही बचा सकता है ।
खेलों के मुकाबले जुयें में मनोरंजन अधिक होता है यह सर्वमान्य तथ्य है तभी क्रिकेट में अन्य खेलों के मुकाबले मनोरंजन का खजाना खुला रहता है । काम धन्धा छोड़ पूरा देश उसी में व्यस्त ०००विद्यार्थी अध्यापक, दुकानदार खरीददार , मज़दूर मालिक , नेता जनता --- पूरा देश आकंठ डूबा ।
सर्वे करिये देश के प्रत्येक नागरिक के कितने काम के घंटे वर्ष भर में क्रिकेट में स्वाहा होते हैं । पूरे देश को कितनी क्षति होती है ?? भारत जैसे विकासशील देश में समय की यह बरबादी हमें ग़रीब बनाने के लिये काफ़ी है ।
हम इंग्लैंड और अंग्रेजों के इतिहास से अगर सबक न ले सके तो हमें डूबने से कोई बचा न सकेगा हमारा भगवान भी नहीं ।जब इंग्लैंड जैसा देश जिसके राज्य में सूरज नहीं डूबता था एक कोने में सिमट कर रह गया , पूरी तरह बिखर गया तब हमारी क्या बिसात ? हम तो वैसे ही कमज़ोर हैं , हम क्रिकेट के धक्के को कतई बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे ।
आइये "क्रिकेट छोड़ें -देश बचायें --एक मुहिम " में हमारा साथ दें । भारत को एक संभावित मुसीबत से उबारें ।। देशप्रेमी , राष्ट्रभक्त साथियों ! आयें भारत बचायें ।।
बदलता भारत(India Changes) आपके साथ ।।
राज कुमार सचान "होरी"
राष्ट्रीय अध्यक्ष --बदलता भारत
www.indiachanges.com , indiachanges2012.blogspot.com , indiachanges2013.blogspot.com , indiachanges2020.blogspot.com , Facebook / pages / India changes
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दोहे जीवन समर के
दोहे जीवन समर के
१---जीवन भर रहते रहे , अपने ही घर द्वार ।
पर अपनो के संग ही , खड़ी रही दीवार ।।
२---जीवन तो जीती रही , जी न सकी पर संास ।
होरी फलती फूलती , बगिया रही उदास ।।
३----एक विटप से जा लिपट , गयी शिखर के पार ।
खड़ा रहा तन कर तना ,इसी लिये इस पार ।।
४----भौंरे !तुझ संग खेलते , फूली फली अगाध ।
मम हिय पर जाना नहीं ,जीता रहा प्रमाद ।।
५-----रेखा तो तिर्यक सरल ,बिन्दु सदा इक रूप ।
दोनो के सम्बन्ध पर , नाचे विद्वत् भूप ।।
६----नारी नर के पास है , नर नारी के पास ।
होरी फिर भी दूरियाँ ,यही प्रकृति संत्रास ।।
०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
राज कुमार सचान "होरी "
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१---जीवन भर रहते रहे , अपने ही घर द्वार ।
पर अपनो के संग ही , खड़ी रही दीवार ।।
२---जीवन तो जीती रही , जी न सकी पर संास ।
होरी फलती फूलती , बगिया रही उदास ।।
३----एक विटप से जा लिपट , गयी शिखर के पार ।
खड़ा रहा तन कर तना ,इसी लिये इस पार ।।
४----भौंरे !तुझ संग खेलते , फूली फली अगाध ।
मम हिय पर जाना नहीं ,जीता रहा प्रमाद ।।
५-----रेखा तो तिर्यक सरल ,बिन्दु सदा इक रूप ।
दोनो के सम्बन्ध पर , नाचे विद्वत् भूप ।।
६----नारी नर के पास है , नर नारी के पास ।
होरी फिर भी दूरियाँ ,यही प्रकृति संत्रास ।।
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राज कुमार सचान "होरी "
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Saturday, 25 May 2013
Friday, 24 May 2013
कैंडिल मार्च क्यों ???
कैंडिल मार्च क्यों ???
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
भाइयों एवं बहनों,
देश में जनसंख्या विष्फोटक स्थिति पर पहुँच चुकी है जो आज देश की सारी प्रगति को दीमक की तरह चाट रही है ।इसी बढ़ती जनसंख्या के कारण आज शहरों में चलना दूर है , चारों ओर जाम ही जाम । अगर हम अभी नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं जब सारे शहर केवल भीड़भाड़ वाले मेलों में तब्दील हो जायेंगे और हम एक स्थान से दूसरे स्थान तक मेलों की भाँति केवल पैदल ही पहुँच पायेंगे ।
जनसंख्या नियंत्रण के लिये जागरूकता कार्यक्रम सरकारों द्वारा चलाये जाते रहे लेकिन आंकडे़ सामने हैं । कभी गंभीरता से चिन्तन करिये तो राष्ट्र के भविष्य के लिये यक्ष प्रश्न खड़ी करती है जनसंख्या । जिस देश की अधिसंख्य आबादी कुपोषण से ग्रस्त, अशिक्षित , बेरोजगार ,ग़रीब हो उस देश से आशा भी क्या की जा सकती है ?
हमारी जनसंख्या का घनत्व ग़रीबी के मध्य सर्वाधिक है । ग़रीबी और आबादी एक दूसरे के पूरक हैं , अन्योन्याश्रित हैं । देश की युवा फौज का 80% अंश ग़रीब परिवारों से है जो स्वयं साधन हीन है ,वे देश के विकास में कितनी भागीदारी निभायेंगे ? जनसंख्यावृद्धि धर्म , सम्प्रदाय , जाति से जोड़ कर देखना एक गंभीर भूल है , समस्या से मुँह मोड़ना है । ग़रीबों की स्थितियां ही ऐसी होती हैं कि उन्हीं के बीच जनसंख्या तेज़ी से फलती फूलती है ।
एक बात यहाँ गंभीरता से समझनी होगी ----- नेताओं, राजनीतिक दलों और धनाड्यों को जनसंख्या बढ़ने से लाभ है -----एक को भारी संख्या में मतदाता मिलते हैं तो दूसरे को मिलते हैं उपभोक्ता और सस्ते श्रमिक । इसलिये राष्ट्र को अपूरणीय क्षति पहुँचाने वाली इस समस्या से हमें ही जूझना होगा । जागरूकता पैदा करने के साथ साथ हमें आन्दोलन चलाने होंगे ---- एक सक्षम क़ानून के लिये । हिन्दू , मुस्लिम , सिख ,ईसाई आदि सभी को कंधे से कंधा मिला कर । चीन का उदाहरण हमारे सामने है । ग़रीब के हित में और राष्ट्र के हित में इस देश को एक न एक दिन "जनसंख्या नियंत्रण अधिनियम "बनाना होगा और देश को अपूरणीय क्षति से बचाना होगा ।
हम कैंडिल मार्च से देश का ध्यान खींचना चाहते हैं और देश की संसद से माँग करते हैं कि शीघ्र ही इस आशय का बिल संसद में लाये और समुचित प्रावधानों के साथ उसे शीघ्र पारित करे ।आइये ,भारत बदलना चाहता है -- समय की माँग है -- बस हम खुले मन से साथ दें ।
बदलता भारत( INDIA CHANGES ) की अनेक माँगे हैं जिनके लिये हम संघर्षरत हैं और उनमें से एक है ---- जनसंख्या नियंत्रण के लिये सक्षम क़ानून की माँग । क़ानून जो सबके लिये समान हो ,कोई दबाव नहीं , जोरजबरदस्ती नहीं --बस एक क़ानून हम सबके लिये ।
आइये जनसंख्या नियंत्रण क़ानून बनवाने के लिये 8 जून 2013 को हम मिल कर कैंडिल मार्च निकाल कर जन जागृति पैदा करे़ और संसद तक अपनी बात पहुंचायें ।
''जनसंख्या के सैलाब में बह न जायें हम कहीं ,
क़ानून की पतवार अब , हाथ में ले लीजिये ।
'होरी' अभी भी है समय कुछ चेतिये,उठ बैठिये ,
डूबने से पूर्व ,जिन्दा कौ़म हैं , कुछ कीजिये ।।'' आपका साथी
राज कुमार सचान 'होरी'
राष्ट्रीय संयोजक
दिनांक --25 मई 2013 INDIA CHANGES (बदलता भारत )
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Emails ---indiachanges2012@gmail.com , indiachanges2013@gmail.com
Delhi office --- 182/3 गुरु कृपा एपार्टममेंट , ग्राउंड फ्लोर , महरौली ,नई दिल्ली -30 ,, ग़ाज़ियाबाद कार्यालय --63 NITI KHAND 3rd ,Indirapuram Gzb
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००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
भाइयों एवं बहनों,
देश में जनसंख्या विष्फोटक स्थिति पर पहुँच चुकी है जो आज देश की सारी प्रगति को दीमक की तरह चाट रही है ।इसी बढ़ती जनसंख्या के कारण आज शहरों में चलना दूर है , चारों ओर जाम ही जाम । अगर हम अभी नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं जब सारे शहर केवल भीड़भाड़ वाले मेलों में तब्दील हो जायेंगे और हम एक स्थान से दूसरे स्थान तक मेलों की भाँति केवल पैदल ही पहुँच पायेंगे ।
जनसंख्या नियंत्रण के लिये जागरूकता कार्यक्रम सरकारों द्वारा चलाये जाते रहे लेकिन आंकडे़ सामने हैं । कभी गंभीरता से चिन्तन करिये तो राष्ट्र के भविष्य के लिये यक्ष प्रश्न खड़ी करती है जनसंख्या । जिस देश की अधिसंख्य आबादी कुपोषण से ग्रस्त, अशिक्षित , बेरोजगार ,ग़रीब हो उस देश से आशा भी क्या की जा सकती है ?
हमारी जनसंख्या का घनत्व ग़रीबी के मध्य सर्वाधिक है । ग़रीबी और आबादी एक दूसरे के पूरक हैं , अन्योन्याश्रित हैं । देश की युवा फौज का 80% अंश ग़रीब परिवारों से है जो स्वयं साधन हीन है ,वे देश के विकास में कितनी भागीदारी निभायेंगे ? जनसंख्यावृद्धि धर्म , सम्प्रदाय , जाति से जोड़ कर देखना एक गंभीर भूल है , समस्या से मुँह मोड़ना है । ग़रीबों की स्थितियां ही ऐसी होती हैं कि उन्हीं के बीच जनसंख्या तेज़ी से फलती फूलती है ।
एक बात यहाँ गंभीरता से समझनी होगी ----- नेताओं, राजनीतिक दलों और धनाड्यों को जनसंख्या बढ़ने से लाभ है -----एक को भारी संख्या में मतदाता मिलते हैं तो दूसरे को मिलते हैं उपभोक्ता और सस्ते श्रमिक । इसलिये राष्ट्र को अपूरणीय क्षति पहुँचाने वाली इस समस्या से हमें ही जूझना होगा । जागरूकता पैदा करने के साथ साथ हमें आन्दोलन चलाने होंगे ---- एक सक्षम क़ानून के लिये । हिन्दू , मुस्लिम , सिख ,ईसाई आदि सभी को कंधे से कंधा मिला कर । चीन का उदाहरण हमारे सामने है । ग़रीब के हित में और राष्ट्र के हित में इस देश को एक न एक दिन "जनसंख्या नियंत्रण अधिनियम "बनाना होगा और देश को अपूरणीय क्षति से बचाना होगा ।
हम कैंडिल मार्च से देश का ध्यान खींचना चाहते हैं और देश की संसद से माँग करते हैं कि शीघ्र ही इस आशय का बिल संसद में लाये और समुचित प्रावधानों के साथ उसे शीघ्र पारित करे ।आइये ,भारत बदलना चाहता है -- समय की माँग है -- बस हम खुले मन से साथ दें ।
बदलता भारत( INDIA CHANGES ) की अनेक माँगे हैं जिनके लिये हम संघर्षरत हैं और उनमें से एक है ---- जनसंख्या नियंत्रण के लिये सक्षम क़ानून की माँग । क़ानून जो सबके लिये समान हो ,कोई दबाव नहीं , जोरजबरदस्ती नहीं --बस एक क़ानून हम सबके लिये ।
आइये जनसंख्या नियंत्रण क़ानून बनवाने के लिये 8 जून 2013 को हम मिल कर कैंडिल मार्च निकाल कर जन जागृति पैदा करे़ और संसद तक अपनी बात पहुंचायें ।
''जनसंख्या के सैलाब में बह न जायें हम कहीं ,
क़ानून की पतवार अब , हाथ में ले लीजिये ।
'होरी' अभी भी है समय कुछ चेतिये,उठ बैठिये ,
डूबने से पूर्व ,जिन्दा कौ़म हैं , कुछ कीजिये ।।'' आपका साथी
राज कुमार सचान 'होरी'
राष्ट्रीय संयोजक
दिनांक --25 मई 2013 INDIA CHANGES (बदलता भारत )
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Emails ---indiachanges2012@gmail.com , indiachanges2013@gmail.com
Delhi office --- 182/3 गुरु कृपा एपार्टममेंट , ग्राउंड फ्लोर , महरौली ,नई दिल्ली -30 ,, ग़ाज़ियाबाद कार्यालय --63 NITI KHAND 3rd ,Indirapuram Gzb
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Thursday, 23 May 2013
4 /कृषि को उद्योग का दर्जा
4 /कृषि को उद्योग का दर्जा
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कृषि के समस्त कार्य एक उद्योग की तरह हैं । लगातार पूंजी निवेश , स्रम , उत्पादन आदि समस्त क्रियायें उद्योगों की भाँति होती हैं । समर्थन मूल्य भी मज़बूरी मे ही सही सरकारों द्वारा जारी किये जाते हैं । कृषक और कृषि असंगठित क्षेत्र हैं इस लिये उद्योंगों की तरह अपने मूल्य का निर्धारण नहीं कर पाता है । लागतें बढ़ती जाती हैं जिससे शुद्ध आय कम हो जाती है । कीमतों का निर्धारण आय और व्यय के आधार पर किया जाता है परन्तु कृषि में ऐसा नहीं हो रहा है । यहाँ किसान फ़सलें बो तो सकता है पर उनकी कीमत उद्योंगो की तरह स्वयं निर्धारित नहीं कर सकता ।
कृषि के अंतर्गत लागत अधिक और आय कम होने के कारण किसानों का जीवनयापन तक कठिन है । देश भर में किसानों के द्वारा आत्महत्या की घटनायें भी प्रकाश में आती रहती हैं । कृषि को लाभकारी बनाना किसानों के लिये तो ज़रूरी है ही समस्त देश के विकास और अनाज उपलब्धता के लिये भी आवश्यक ही नहीं अपितु अनिवार्य भी है ।
एक उद्योग की तरह बैंकों से लोन भी स्वीकृत नहीं हो सकता ।कृषि को स्वयं बैंक घाटे का क्षेत्र मानता है। परन्तु दोनों स्थितियों से किसान को मुक्ति मिल सकती है यदि कृषि को उद्योग का दर्जा दे दिया जाय ।
इंडिया चेंजेज़ (INDIA CHANGES )
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कृषि के समस्त कार्य एक उद्योग की तरह हैं । लगातार पूंजी निवेश , स्रम , उत्पादन आदि समस्त क्रियायें उद्योगों की भाँति होती हैं । समर्थन मूल्य भी मज़बूरी मे ही सही सरकारों द्वारा जारी किये जाते हैं । कृषक और कृषि असंगठित क्षेत्र हैं इस लिये उद्योंगों की तरह अपने मूल्य का निर्धारण नहीं कर पाता है । लागतें बढ़ती जाती हैं जिससे शुद्ध आय कम हो जाती है । कीमतों का निर्धारण आय और व्यय के आधार पर किया जाता है परन्तु कृषि में ऐसा नहीं हो रहा है । यहाँ किसान फ़सलें बो तो सकता है पर उनकी कीमत उद्योंगो की तरह स्वयं निर्धारित नहीं कर सकता ।
कृषि के अंतर्गत लागत अधिक और आय कम होने के कारण किसानों का जीवनयापन तक कठिन है । देश भर में किसानों के द्वारा आत्महत्या की घटनायें भी प्रकाश में आती रहती हैं । कृषि को लाभकारी बनाना किसानों के लिये तो ज़रूरी है ही समस्त देश के विकास और अनाज उपलब्धता के लिये भी आवश्यक ही नहीं अपितु अनिवार्य भी है ।
एक उद्योग की तरह बैंकों से लोन भी स्वीकृत नहीं हो सकता ।कृषि को स्वयं बैंक घाटे का क्षेत्र मानता है। परन्तु दोनों स्थितियों से किसान को मुक्ति मिल सकती है यदि कृषि को उद्योग का दर्जा दे दिया जाय ।
इंडिया चेंजेज़ (INDIA CHANGES )
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कैंडिल मार्च
कैंडिल मार्च
दिनांक 8 जून 2013 समय 6 सायं से आरम्भ ।
स्थान ------महर्षि बाल्मीकि मंदिर निकट मदर डेरी चौक सेक्टर --5 राजेंद्र नगर से सरदार पटेल पार्क मोहन नगर चौराहा
माँग --- "जनसंख्या नियंत्रण क़ानून " को संसद द्वारा बनाया जाय ।
दिनांक 8 जून शनिवार को सायं 6 बजे से जनसंख्या नियंत्रण क़ानून के बनाये जाने की माँग के समर्थन में एक कैंडिल मार्च महर्षि बाल्मीकि मंदिर , राजेन्द्र नगर से " बदलता भारत " (INDIA CHANGES ) संगठन द्वारा निकाला जायेगा । यह कैंडिल मार्च विभिन्न स्थानों से होता हुआ 8 बजे सायं पटेल पार्क , मोहन नगर चौराहा पहुँचेगा जहाँ पर इसका समापन होगा ।
आज देश जनसंख्या विस्फोट के मुहाने पर खड़ा है ।जहाँ सौ वर्ष पहले 1901 में भारत की जनसंख्या ( पाकिस्तान और बांग्लादेश को सम्मिलित करते हुये ) 23 करोड़ 80 लाख मात्र थी वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार केवल अपने देश की जनसंख्या 125 करोड़ से अधिक है । यह वृद्धि तब है जब परिवार नियोजन और परिवार कल्याण के कार्यक्रम जोर शोर से राज्य और केन्द्र की सरकारों द्वारा चलाये जाते रहे हैं । आज जनसंख्या में हम विश्व में दूसरे स्थान पर हैं और मात्र 8 वर्षों बाद 2021 में हमारा देश पहले स्थान पर पहुँच जायेगा ।
80 करोड़ ग़रीबों का यह देश विश्व में ग़रीबी में सर्वोच्च पाँच स्थानों पर है । कितना शर्मनाक है यह ? यह अन्योन्याश्रित सत्य है कि ग़रीबी से जनसंख्या बढ़ती है और जनसंख्या से ग़रीबी बढ़ती है । यह एक कटु और ऐतिहासिक तथा अर्थशास्त्रीय सत्य है कि जनसंख्या वृद्धि ग़रीबी और ग़रीबों को बढ़ाती है ।किसी भी परिवार और राष्ट्र के आर्थिक संसाधन तो अंकगणितीय अनुपात में बढ़ते हैं जबकि जनसंख्या बीजगणितीय अनुपात में । आज स्थिति यह है कि देश में बहुमुखी विकास के बावजूद ग़रीबी भयानक रूप से बढ़ी है ।
जनसंख्या में बढो़तरी अमीरों के लिये उतनी कष्टकारी नहीं जितनी ग़रीबों के लिये । बच्चे अधिक होने से कुपोषण , अशिक्षा , बीमारी , ग़रीबी , अपराध एक साथ बढ़ते हैं । यह एक भ्रांति है और मिथ्या तथ्य है कि अधिक बच्चे ग़रीब के लिये अधिक काम करने वाले पैदा करते हैं इसलिये उसकी आर्थिक स्थिति सुधरती है । दो हाथों के साथ एक पेट भी तो आता है और उन हाथों के पास कोई संसाधन भी नहीं होते हैं और मात्र मज़दूरी पर आश्रित हो जाने से ग़रीबी साथ नहीं छोड़ती ।अभाव में जीवन और ग़रीब , और अभिशप्त हो जाता है ।
बदलता भारत ने इस समस्या का सांगोपांग अध्ययन किया है और पाया है कि देश के ग़रीबों के हित में जनसंख्या नियंत्रण विशेष रूप से आवश्यक है ।ग़रीबी मिटाने के लिये जनसंख्या नियंत्रित होनी आवश्यक है और इसका नियंत्रण अब बिना क़ानून के नहीं हो सकता । बिना जोर जबरदस्ती और बल प्रयोग के समानरूप से सभी के लिये परिवार नियोजन का एक ही उपाय है इसकेलिये सर्वोच्च संस्था संसद द्वारा एक ऐसा विधान बनाया जाय जो बिना किसी विभेद के समस्त भारतीय नागरिकों पर लागू हो । क़ानून की धारायें सख्त हों और उनके उल्लंघन पर कड़े प्रावधान हों । चीन से इस संबंध में बहुत कुछ सीखा जा सकता है ।
जनसंख्या बढ़ने से अशिक्षा , ग़रीबी बढ़ने से अपराधों में वृद्धि होती है । माँग और आपूर्ति में भारी अन्तर से आर्थिक भ्रष्टाचार बढ़ता है । शहरों में चारों ओर जाम और रेलों और बसों में लम्बी लम्बी वेटिंग क्या है ? एक दिन ये सारे शहर मात्र पैदल चलने लायक ही बचेंगे । दिल्ली और अन्य नगरों में नारियों के प्रति अपराध और बलात्कार क्या हैं ? ग़रीबों ,अशिक्षितों की फौजें तैयार हो गयी है़ जो न तो क़ानून जानती हैं और उनके पास संस्कार सीखने का न तो अवसर है न सुविधायें । जनसंख्या नियंत्रण से इन क्षेत्रोंमे भी सुधार होगा निश्चित ही ।
सम्पूर्ण देश में समस्त समान विचारधारा के संगठनों के साथ मिल कर जगह जगह सभाओं , रैलियों के द्वारा जागरूकता पैदा करने का कार्य बदलता भारत करेगा और आवश्यकता पड़ने पर बड़ा आन्दोलन भी खड़ा करेगा जब तक समस्त समस्याओं की जड़ जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिये कोई सशक्त क़ानून न बन जाय । देश के समस्त तालों की चाभी " जनसंख्या नियंत्रण क़ानून " है । आइये इसके लिये , राष्ट्र के लिये और ग़रीबों के लिये वातावरण बनायें ।
8जून के कैंडिल मार्च का नेतृत्व प्रसिद्ध कवि, लेखक, साहित्यकार, प्रखर वक्ता और राष्ट्रीय संयोजक बदलता भारत श्री राज कुमार सचान 'होरी' करेंगे । इसका संयोजन बदलता भारत की ग़ाज़ियाबाद इकाई द्वारा किया जा रहा है ।श्री विकास चौधरी मंडलीय संयोजक और ग़ाज़ियाबाद प्रवक्ता श्री सूर्यप्रकाश शर्मा की देखरेख में आयोजन किया जा रहा है । राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री शीतला शंकर विजय मिश्र , प्रसिद्ध कवि पं सुरेश नीरव राष्ट्रीय प्रवक्ता , मीडिया प्रभारी श्री कुलदीप सिंह राजपूत , श्री कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी , श्री जी एस त्यागी , श्री रोहित राज सचान एडवोकेट तथा अन्य अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तियों द्वारा भाग लिया जायेगा ।
आप समस्त से अनुरोध है कि इस मार्च में भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनायें ।
नोट ---इसी प्रकार 8 जून को अन्य नगरों( उ प्र) ,हरियाणा में कैंडिल मार्च के आयोजन ।
बदलता भारत (INDIA CHANGES )
Eid -indiachanges2012@gmail.com , indiachanges2013@gmail.com
www.indiachanges.com , horiindiachanges.blogspot.com , horibadaltabharat.blogspot.com , indiachanges2020.blogspot.com , Facebook.com/pages/India-changes
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दिनांक 8 जून 2013 समय 6 सायं से आरम्भ ।
स्थान ------महर्षि बाल्मीकि मंदिर निकट मदर डेरी चौक सेक्टर --5 राजेंद्र नगर से सरदार पटेल पार्क मोहन नगर चौराहा
माँग --- "जनसंख्या नियंत्रण क़ानून " को संसद द्वारा बनाया जाय ।
दिनांक 8 जून शनिवार को सायं 6 बजे से जनसंख्या नियंत्रण क़ानून के बनाये जाने की माँग के समर्थन में एक कैंडिल मार्च महर्षि बाल्मीकि मंदिर , राजेन्द्र नगर से " बदलता भारत " (INDIA CHANGES ) संगठन द्वारा निकाला जायेगा । यह कैंडिल मार्च विभिन्न स्थानों से होता हुआ 8 बजे सायं पटेल पार्क , मोहन नगर चौराहा पहुँचेगा जहाँ पर इसका समापन होगा ।
आज देश जनसंख्या विस्फोट के मुहाने पर खड़ा है ।जहाँ सौ वर्ष पहले 1901 में भारत की जनसंख्या ( पाकिस्तान और बांग्लादेश को सम्मिलित करते हुये ) 23 करोड़ 80 लाख मात्र थी वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार केवल अपने देश की जनसंख्या 125 करोड़ से अधिक है । यह वृद्धि तब है जब परिवार नियोजन और परिवार कल्याण के कार्यक्रम जोर शोर से राज्य और केन्द्र की सरकारों द्वारा चलाये जाते रहे हैं । आज जनसंख्या में हम विश्व में दूसरे स्थान पर हैं और मात्र 8 वर्षों बाद 2021 में हमारा देश पहले स्थान पर पहुँच जायेगा ।
80 करोड़ ग़रीबों का यह देश विश्व में ग़रीबी में सर्वोच्च पाँच स्थानों पर है । कितना शर्मनाक है यह ? यह अन्योन्याश्रित सत्य है कि ग़रीबी से जनसंख्या बढ़ती है और जनसंख्या से ग़रीबी बढ़ती है । यह एक कटु और ऐतिहासिक तथा अर्थशास्त्रीय सत्य है कि जनसंख्या वृद्धि ग़रीबी और ग़रीबों को बढ़ाती है ।किसी भी परिवार और राष्ट्र के आर्थिक संसाधन तो अंकगणितीय अनुपात में बढ़ते हैं जबकि जनसंख्या बीजगणितीय अनुपात में । आज स्थिति यह है कि देश में बहुमुखी विकास के बावजूद ग़रीबी भयानक रूप से बढ़ी है ।
जनसंख्या में बढो़तरी अमीरों के लिये उतनी कष्टकारी नहीं जितनी ग़रीबों के लिये । बच्चे अधिक होने से कुपोषण , अशिक्षा , बीमारी , ग़रीबी , अपराध एक साथ बढ़ते हैं । यह एक भ्रांति है और मिथ्या तथ्य है कि अधिक बच्चे ग़रीब के लिये अधिक काम करने वाले पैदा करते हैं इसलिये उसकी आर्थिक स्थिति सुधरती है । दो हाथों के साथ एक पेट भी तो आता है और उन हाथों के पास कोई संसाधन भी नहीं होते हैं और मात्र मज़दूरी पर आश्रित हो जाने से ग़रीबी साथ नहीं छोड़ती ।अभाव में जीवन और ग़रीब , और अभिशप्त हो जाता है ।
बदलता भारत ने इस समस्या का सांगोपांग अध्ययन किया है और पाया है कि देश के ग़रीबों के हित में जनसंख्या नियंत्रण विशेष रूप से आवश्यक है ।ग़रीबी मिटाने के लिये जनसंख्या नियंत्रित होनी आवश्यक है और इसका नियंत्रण अब बिना क़ानून के नहीं हो सकता । बिना जोर जबरदस्ती और बल प्रयोग के समानरूप से सभी के लिये परिवार नियोजन का एक ही उपाय है इसकेलिये सर्वोच्च संस्था संसद द्वारा एक ऐसा विधान बनाया जाय जो बिना किसी विभेद के समस्त भारतीय नागरिकों पर लागू हो । क़ानून की धारायें सख्त हों और उनके उल्लंघन पर कड़े प्रावधान हों । चीन से इस संबंध में बहुत कुछ सीखा जा सकता है ।
जनसंख्या बढ़ने से अशिक्षा , ग़रीबी बढ़ने से अपराधों में वृद्धि होती है । माँग और आपूर्ति में भारी अन्तर से आर्थिक भ्रष्टाचार बढ़ता है । शहरों में चारों ओर जाम और रेलों और बसों में लम्बी लम्बी वेटिंग क्या है ? एक दिन ये सारे शहर मात्र पैदल चलने लायक ही बचेंगे । दिल्ली और अन्य नगरों में नारियों के प्रति अपराध और बलात्कार क्या हैं ? ग़रीबों ,अशिक्षितों की फौजें तैयार हो गयी है़ जो न तो क़ानून जानती हैं और उनके पास संस्कार सीखने का न तो अवसर है न सुविधायें । जनसंख्या नियंत्रण से इन क्षेत्रोंमे भी सुधार होगा निश्चित ही ।
सम्पूर्ण देश में समस्त समान विचारधारा के संगठनों के साथ मिल कर जगह जगह सभाओं , रैलियों के द्वारा जागरूकता पैदा करने का कार्य बदलता भारत करेगा और आवश्यकता पड़ने पर बड़ा आन्दोलन भी खड़ा करेगा जब तक समस्त समस्याओं की जड़ जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिये कोई सशक्त क़ानून न बन जाय । देश के समस्त तालों की चाभी " जनसंख्या नियंत्रण क़ानून " है । आइये इसके लिये , राष्ट्र के लिये और ग़रीबों के लिये वातावरण बनायें ।
8जून के कैंडिल मार्च का नेतृत्व प्रसिद्ध कवि, लेखक, साहित्यकार, प्रखर वक्ता और राष्ट्रीय संयोजक बदलता भारत श्री राज कुमार सचान 'होरी' करेंगे । इसका संयोजन बदलता भारत की ग़ाज़ियाबाद इकाई द्वारा किया जा रहा है ।श्री विकास चौधरी मंडलीय संयोजक और ग़ाज़ियाबाद प्रवक्ता श्री सूर्यप्रकाश शर्मा की देखरेख में आयोजन किया जा रहा है । राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री शीतला शंकर विजय मिश्र , प्रसिद्ध कवि पं सुरेश नीरव राष्ट्रीय प्रवक्ता , मीडिया प्रभारी श्री कुलदीप सिंह राजपूत , श्री कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी , श्री जी एस त्यागी , श्री रोहित राज सचान एडवोकेट तथा अन्य अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तियों द्वारा भाग लिया जायेगा ।
आप समस्त से अनुरोध है कि इस मार्च में भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनायें ।
नोट ---इसी प्रकार 8 जून को अन्य नगरों( उ प्र) ,हरियाणा में कैंडिल मार्च के आयोजन ।
बदलता भारत (INDIA CHANGES )
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Thursday, 18 April 2013
No cates
If we are serious to save our country for future slavery and gulami , we must eradicate caste ism in all forms . Only caste ism can perish us .
Tuesday, 25 October 2011
jatiwad jahar par samapt kaise ho ?
जातियां कैसे मिटें ? लम्बवत संरचना से या क्षैतिज संरचना से ....वास्तव में देश में जातियों का ढांचा सदा ही उर्ध्वाधर रहा है , इसी कारण आपस में बराबरी न होने के कारण जातियों में आपसी तालमेल और रोटी बेटी के संबंधों का घोर अभाव है |
बुद्ध , महावीर , स्वामी दयानंद ,आदि आदि आये गए पर जातियां नहीं मिटीं | यदि क्षैतिज ढांचा रहा होता तो आपसी बराबरी होती , शादी व्याह होते और रोटी बेटी के सम्बन्ध होते | निश्चित ही जातियां मिटतीं और जाती व्यवस्था मिट गयी होती |
इस सबके लिए हमें छोटी जातियों, पिछड़ी जातियों को ऊपर उठाना होगा ,उनको बराबरी पर लाना होगा |इन जातियों में सुधार और उत्थान के कार्यक्रम चलाने होंगे |
Thursday, 25 August 2011
EK GAZAL APNON KE LIYE
एक ग़ज़ल अपनों के लिए ....
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
[1] औरों की ओर ताकते कब तक युं रहोगे ,
'होरी' स्वयं के मध्य से नेता उभारिये |
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
[२] गैरों की आरती तो उतारी है अब तलक ,
'होरी' सहोदरों की आरती उतारिये |
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
[३] लड़ते रहे हैं आप सदा निज कुटुंब से ,
'होरी' अदावतों को तो, अब तो बिसारिये |
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
[४] बीते हैं दिन बहुत, यह शिर नीचे किये हुए,
'होरी' जी अपने आप को, अब तो सम्हारिये |
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
[5] आपस की रंजिशों का यह, शैतान जी लिया ,
'होरी' जी इस शैतान का , सर अब उतारिये |
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
[६] गैरों के लिए अपनों को मारा है आपने ,
'होरी' इन अपनों को नहीं , अब और मारिये |
****************************************************
राज कुमार सचान 'होरी'
ANNA KE NAAM 'HORI' KI KHULI CHITTHI
अगर लोकपाल तानाशाह बन गया .....
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
अन्ना जी आपको सम्पूर्ण आदर के साथ प्रणाम करते हुए कहना चाहता हूँ कि हमारे संविधान निर्माताओं , स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले नेताओं ने ऐसी व्यवस्था की थी जिस से प्रधान मंत्री , राष्ट्रपति , सेनाओं का प्रमुख ,उच्चतम न्यायलय का मुख्य न्यायाधीश इनमे से कोई भी इतना सर्वशक्तिमान न बनने पाए की एक दिन वह तानाशाह ही बन कर देश की सारी सत्ता अपने हाथ में ले ले | इसी का परिणाम है की देश सुरक्षित है | इसी कारण आप और आप के साथ जनता आन्दोलन कर पा रही है , हर किसी को अपनी बात रखने में स्वतंत्रता है | भूल गए ७५ की इमरजेंसी ?
आप अपने आन्दोलन और अनसन के बल पर अगर संसद को झुका कर एक सर्वशक्तिमान , तानाशाह लोकपाल बनवाने में सफल हो गए और भविष्य में एक तानाशाह लोकपाल आ गया , प्रजातंत्र को नष्ट कर दिया तब यह देश बिखर जायेगा , जिसके लिए आपको भावी पीढियां क्षमा नहीं करेंगी और न ही गाँधी , सरदार पटेल , सुभाष , भगत सिंह जैसे अनेकों की आत्माएं तुम्हे कभी माफ़ करेंगी | अभी समय है ...थोडा सोचो ... तुम्हारे साथी भी सोचें ऐसे ही आज़ादी नहीं मिली , इसे फिर गंवाना नहीं चाहेंगे |
एक और महत्वपूर्ण तथ्य जनलोकपाल यानि अन्ना के लोकपाल पर ...शिकायत कर्ता को इतनी छूट है कि गैर जिम्मेदाराना शिकायतों की बाढ़ आजायेगी , कार्यपालिका के काम शिथिल पड़ जायेंगे| कर्मचारी , अधिकारी , मंत्री और अन्य निर्णय लेने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति शिकायतों के भय से काम में अनावश्यक विलम्ब करेंगे | कुछ दलाल और माफिया प्रकार के लोग कार्यपालिका को हर स्तर पर ब्लैकमेल करेंगे , परिणाम स्वरुप देश का विकास बाधित होगा |
अन्ना उनके साथियों, और जनता के नाम खुली चिट्ठी
राज कुमार सचान 'होरी'
Saturday, 16 July 2011
inter caste marriages
INDIA IS SUFFERING FROM TERRORISM BECAUSE OF SOFT STATE . THIS IS SOFT BECAUSE IT IS DIVIDED IN
CASTES , RELIGIONS. POLITICALLY IT IS WEAK BECAUSE IT DEPENDS UPON DIVISION OF VOTES .DIVISION OF VOTES ON THESE BASIS PUNCTURES HEARTS OF INDIANS. PUNCTURED HEARTS CAN NOT BE UNITED. DUE TO NON INTEGRATION INDIA DOES NOT STANDS
UNITED FOR ONE CAUSE , EVEN AGAINST TERRORISM
WE ARE DIVIDED
KASAB IS CELEBRATING HIS BIRTH DAY ON 13TH . HIS FRIENDS MAKE IT. POLITICIANS ARE QUARRELING LIKE ANIMALS, COUNTRY IS SUFFERING AND SUFFERING INDIANS.
GURU AFZAL IS ENJOING TO SEE WEAK INDIA . LIKE MOHAMMAD GORI ,GAZNAVI ,NADIR SHAH AND BABAR LEADERS OF TERRORISM ARE HAPPY.
MAY GOD BLESS INDIA AND INDIANS. IF ONLY IF INDIA ABOLISH ITS CATE SYSTEM THERE IS HOPE AND THAT PATH IS THROUGH INTER CASTE MARRIAGES.
CASTES , RELIGIONS. POLITICALLY IT IS WEAK BECAUSE IT DEPENDS UPON DIVISION OF VOTES .DIVISION OF VOTES ON THESE BASIS PUNCTURES HEARTS OF INDIANS. PUNCTURED HEARTS CAN NOT BE UNITED. DUE TO NON INTEGRATION INDIA DOES NOT STANDS
UNITED FOR ONE CAUSE , EVEN AGAINST TERRORISM
WE ARE DIVIDED
KASAB IS CELEBRATING HIS BIRTH DAY ON 13TH . HIS FRIENDS MAKE IT. POLITICIANS ARE QUARRELING LIKE ANIMALS, COUNTRY IS SUFFERING AND SUFFERING INDIANS.
GURU AFZAL IS ENJOING TO SEE WEAK INDIA . LIKE MOHAMMAD GORI ,GAZNAVI ,NADIR SHAH AND BABAR LEADERS OF TERRORISM ARE HAPPY.
MAY GOD BLESS INDIA AND INDIANS. IF ONLY IF INDIA ABOLISH ITS CATE SYSTEM THERE IS HOPE AND THAT PATH IS THROUGH INTER CASTE MARRIAGES.
Monday, 4 July 2011
casteism to make horizontal
INDIAN CASTE SYSTEM IS LIKE A PYRAMID. VERTICAL. GRADUALY U RISE UPWARDS NOS OF CASTES AND NOS IN TOTAL DECREASES . IF WE TRAVEL PYRAMID TOWARDS LOWEWR SIDE NOS INCREASES . SOCIAL REFORMERS HAVE COME AND GONE BUT CASTE SYSTEM STILL EXISTS IN FULL CAPACITY AND STRENTH. NOW INDIA FIGHTS CASTEISM HAVE STUDIED THAT WE MUST MAKE FIRST OF ALL THIS PYRAMID COLLAPSED. ALL CASTES FOM UPPER TO BOTTOM BE PUT IN HORIZONTAL .THEN AMALGAMATION WILL BE POSSIBLE ONLY . ONLY HORIZONTAL CLASSES MARRY WITH EACH OTHERS .
Tuesday, 28 June 2011
jaatiyaan kaise miten
जातियां कैसे मिटें , कुछ सोचिये |
दूरियां कैसे हटें , रखिये दिए ||
***************************
बोलिए कुछ भी ,अरे कुछ भी सही ,
बोलिए दिल खोल कर पर बोलिए |
*******************************
जातियां मेटेंगी हमको फिर कभी ,
बैठिये होंठों को मत यूँही सिये |
***************************
देश को हम एक कर पाए न यदि ,
'होरी' जिए हम इस तरह तो क्या जिए ?
*********************************
राज कुमार सचान 'होरी'
दूरियां कैसे हटें , रखिये दिए ||
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बोलिए कुछ भी ,अरे कुछ भी सही ,
बोलिए दिल खोल कर पर बोलिए |
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जातियां मेटेंगी हमको फिर कभी ,
बैठिये होंठों को मत यूँही सिये |
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देश को हम एक कर पाए न यदि ,
'होरी' जिए हम इस तरह तो क्या जिए ?
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राज कुमार सचान 'होरी'
save india
DUE TO SOCIAL DISINTEGRATION INDIA IS NOT BECOMING WORLD POWER . CASTEISM IN INDIA MAKES DIFFERENCES AMONG INDIANS . WE DONT FEEL AS ONE SOCIETY . INTER CASTE MARRIAGES CAN WEAKENCASTE SYSTEM OF INDIA . LET US ALL PURSUE IT . JOIN 'INDIA FIGHTS CASTEISM' IF YOU AGREE SEND YOUR EMAIL ID TO .....rhori@ymail.com
Sunday, 26 June 2011
casteism a poison
INDIA IS DIVIDED IN CASTES . AS YOU KNOW ....UNITED WE STAND , DIVIDED WE FALL .DUE TO THIS VERY POISON INDIA HAVE BEEN ILL SINCE LONG TIME .UNLESS WE GIVE ANTIDOTE TO POISON INDIA WILL NOT SURVIVE . FOR SURVIVAL OF OUR COUNTRY LET US FIGHT AGAINST CASTEISM. WE SHOULD TAKE OATH TO ABOLISH CASTEISM TO SAVE INDIA .
RAJ KUMAR SACHAN 'HORI'
RAJ KUMAR SACHAN 'HORI'
Monday, 20 June 2011
INDIAN APARTHIED
CASTE SYSTEM IS INDIAN APARTHIED. IT DISCRIMINATES BETWEEN MAN TO MAN BY BIRTH. TO MAKE INDIANS ONE , THIS DISCRIMINATIVE SYSTEM MUST GO. IN 21ST CENTURY INDIA IS STILL IN THE GRIP OF APARTHIED CASTE SYSTEM.THOUGH MODERN INDIA IS AGAINST THE SYSTEM, AND SPECIALLY YOUTHS BREAK IT NOW AND THEN AND DO INTERCASTE MARRIAGES. INTERCASTE MARRIAGES IS A EFFECTIVE TOOL AGAINST THE SYSTEM.LET INDIA FOLLOW THIS PATH.
Friday, 17 June 2011
INDIA FIGHTS CASTEISM: INTERCASTE MARRIAGE INFORMATION OF
INDIA FIGHTS CASTEISM: INTERCASTE MARRIAGE INFORMATION OF: "READERS OF BLOGS ARE REQUESTED TO INFORM IF YOU HAVE DONE INTERCASTE MARRIAGE . 1..YUOR AND SPOUSE NAME 2.. ADRESSES OF BOTH ..."
INTERCASTE MARRIAGE INFORMATION OF
READERS OF BLOGS ARE REQUESTED TO INFORM IF YOU HAVE DONE INTERCASTE MARRIAGE . 1..YUOR AND SPOUSE NAME 2.. ADRESSES OF BOTH 3.. RELIGIONS OF BOTH 4.. ANY PROBLEM IN SOCIETY? 5.. YOURS EMAIL ID. 6.. SAME DETAILS IF YOU ARE PLANNING INTER CASTE MARRIAGE. PL. SEND US IN EMAIL ID rhori@ymail.com , rhori16@gmail.com
our team will try to help you when required.
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Thursday, 16 June 2011
breaking of caste barriors
In past several social and political leaders of india such as kabir[poet and reformer] , jyoti baa fule , raamaaswami naykar, swami dayanand saraswati, dr bhim rao ambedkar have campained against caste system. Due to their efforts caste system is now a days not so rigid as this was in past . But untill and unless this this not ends , india is to suffer . Here due to casteism national brotherhood is not established except durig war. this is not good for any country . National feeling in our country is last priority, we dont feel proud to be indian in our deeds. Due to lack of nationalism corruption in india is in peak .Main enemy of nationalism is casteism. let us fight , join movements .....INDIA FIGHTS CASTEISM and JAATI TODO , RAASHTRA JODO.
Wednesday, 15 June 2011
how to make india .world power
INDIA CAN BECOME A WORLD POWER BY 2 STEPS .....[1] CONTROLLING ITS POPULATION. [2] ABOLISHING ITS CASTE SYSTEM . WE THE CITIZENS OF INDIA CAN MAKE THE DIFFERENCE . AT BOTH FRONT WE ARE LACKING . IF ALL THE NGOS OF INDIA DETERMINE TO MAKE HARD EFFORTS IN THESE LINES , SURELY THE RESULT WILL COME . DONT THINK DO ONLY. LET US MAKE INDIA ....A WORD POWER.
india, my india
India is one country which suffrered from casteism a lot . we are more than 125 crores , but quarreling with one another on the basis of casteism . here are thousands castes which are far far away with one another. if they unite there will be power and strenth . history tells us india had been defeated again and again because of division of castes.come on and fight casteism . join INDIA FIGHTS CASTEISM and JAATI TODO , RAASHTRA JODO.
Monday, 13 June 2011
kavita 5
अपने भारत में असंख्य देवी देवता .
असंख्य जातियां |
जातियों के अन्दर जातियाँ |
आखिर हम उत्पादन में विश्वश्रेष्ठ जो हैं , चाहे संतान ,
या देवी देवता ,
अस्थिर मन भटकता है करता है नित नया श्रजन
बना कर भेद मनुष्य , मनुष्य में अहम् तुष्टि के लिए |
RAJ KUMAR SACHAAN 'HORI'
Sunday, 12 June 2011
casteism is a sin 2
in india we have flexible religion but rigid caste system . here castes are seperate compartments. origanly there were four warnas . slowly and slowly from this hindus have created thousands castes. higher , middle lower. some were treated as untouchables.by now 80% population is in backward and sc categories. today politics is based on castes completely. each indian is a caste , he is indian latter.whole country had been divided in castes. castes quarell with oneanother.when foriegners attacked india no unity. castes were fighting.india lost its battles because of caste divisions. angrej always said .....india is a group of nations not a single nation. let us fight back against casteism. before we become slave again we must abolish caste system. one step is to make intercaste marriages. 'INDIA FIGHTS CASTEISM' and 'JAATI TODO , RAASHTRA JODO' MOVMENTS are necesity of time.SAVE INDIA
Saturday, 11 June 2011
casteism is a sin
मनुष्य मनुष्य में भेद करने वाली जाति प्रथा मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है . जन्म से सारे मनुष्य समान होते हैं . कोई छोटा बड़ा नहीं . परन्तु भारत में जन्म के आधार पर ही छोटा बड़ा , ऊंच नीच मान लेते हैं . यह दुर्भाग्यपूर्ण और मानवता विरोधी है .हमें भारत को यदि स्वतंत्र प्रभुता सम्पन्न राष्ट्र बनाए रखना है तो जाति प्रथा को समूल नष्ट करना होगा .अन्यथा एक बार फिर भारत गुलाम हो जाएगा . आईये india fights casteism [जाति तोड़ो , राष्ट्र जोड़ो ] के सदष्य बन कर राष्ट्र बचाएं
राज कुमार सचान
'होरी'
Thursday, 9 June 2011
Hori: kuchh dohe
Hori: kuchh dohe: "अन्ना जी दलबल सहित , रूठ , गए निज धाम शांत प्रशांत हुए व्यथित , लोकपाल के ग्राम ***********************************..."
AN APEAL
'INDIA FIGHTS CASTEISM' APEALS INDIANS TO MAKE INTERCASTE MARRIAGES TO MAKE COHESSIVE SOCIETY. ONLY CASTELESS INDIA CAN STAND BY TIME. THERE MUST BE ONE AND ONLY ONE CASTE ...'INDIAN'. PL JOIN ORGANISATION AND STRENTHEN INDIA . MAKE IT A WORLD POWER. PL CONVEY YOUR ACCEPTENCE AND DETAIL THROUGH EMAIL rhori16@gmail.com
Wednesday, 1 June 2011
jaatiya dohe
जाति जाति के घर यहाँ , जाति जाति दरबार |
'होरी' भारत देश का , यूँ ही बंटाढार ||
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अनगिन देवी देवता , अनगिन जाति समूह |
'होरी' भारत की नियति , फंसा जाति के व्यूह ||
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जाति न छोड़ेंगे भले , देश रसातल जाय |
'होरी' फिर से राज को , भले विदेशी आय ||
राज कुमार सचान 'होरी'
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